कविता : नन्हीं चिड़िया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 22 मार्च 2026

कविता : नन्हीं चिड़िया

Mahima-singh-ganv-ki-awaz
नन्हीं सी वह चिड़िया है,

डाली पर वो बैठी रहती है,

हमको प्यारी सी लगती है,

नन्हीं सी वह चिड़िया है,

गाना अपना सुनाती है,

मीठी बोली दिल को छू जाती है,

उसका प्यार गाना सुनकर,

मोर भी नाचने लगते हैं,

नन्ही सी वो प्यारी चिड़िया,

बहुत खुश हो जाती है,

उसकी प्यारी खुशी देखकर,

जंगल के फूल खिल जाते हैं।।



महिमा सिंह

उत्तराखंड

टीम गांव की आवाज 

कोई टिप्पणी नहीं: