कविता : मिटाओ दहेज प्रथा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 22 मार्च 2026

कविता : मिटाओ दहेज प्रथा

निर्मला-गांव-कीगवज
मिटाओ इस भ्रम को,

मिटाओ इस प्रथा को,

जो लाचारी का फरमान है,

दहेज ही वो बुरी प्रथा है,

जो लेता बेटियों की जान है,

लालच का जो चश्मा लगाकर,

गुण उसे फिर नजर न आता,

दहेज कोई प्रथा नहीं, कलंक है,

ये समाज कब समझेगा?

इसमें बेटियों की खुशी नहीं होती,

मिटता उसका केवल अरमान है,

ये रीति रिवाज नहीं, लोगों का भ्रम है।।





निर्मला

उम्र – 16

जगथाना, उत्तराखंड

टीम, गाँव की आवाज़

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