मिटाओ इस प्रथा को,
जो लाचारी का फरमान है,
दहेज ही वो बुरी प्रथा है,
जो लेता बेटियों की जान है,
लालच का जो चश्मा लगाकर,
गुण उसे फिर नजर न आता,
दहेज कोई प्रथा नहीं, कलंक है,
ये समाज कब समझेगा?
इसमें बेटियों की खुशी नहीं होती,
मिटता उसका केवल अरमान है,
ये रीति रिवाज नहीं, लोगों का भ्रम है।।
निर्मला
उम्र – 16
जगथाना, उत्तराखंड
टीम, गाँव की आवाज़

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