सीहोर : भगवान कृष्ण और माता रुक्मणी का मंगल परिणय की झांकी सजाई - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 17 मार्च 2026

सीहोर : भगवान कृष्ण और माता रुक्मणी का मंगल परिणय की झांकी सजाई

  • आज खेली जाएगी फूलों की होली, कथा का भव्य रूप से किया जाएगा समापन

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सीहोर। भगवान का नाम, सत्संग और भागवत कथा के श्रवण मात्र से समस्त पाप नाश होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। जन्म-जन्मांतर के पुण्य का उदय होने पर भागवत कथा सुनने को मिलती है, जिससे अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। भागवत कथा के श्रवण से बढ़कर इस संसार में कोई ज्ञान, मोक्ष का सरल साधन नहीं है। सभी प्रकार की मनोकामना सिद्ध होती है। उक्त विचार शहर के महिला घाट गंगेश्वर महादेव शनि मंदिर परिसर नदी चौराहे पर आयोजित भागवत कथा के छठवे दिवस ब्रह्मलीन श्री त्यागी महाराज के शिष्य महंत उद्धव दास महाराज ने कहे। मंगलवार को श्रीकृष्ण और रुकमणी का मंगल विवाह कराया गया। इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के विवाह के बारे में कहा कि सत्य और प्रेम का मिलन ही भगवान का विवाह है।


कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान के जन्म के छठे दिन ही अविद्या नामक पूतना का वध किया क्यो कि जन्म से ही यह अविद्या साथ होती है। परन्तु जहां भी श्री कृष्ण का चिंतन होता हैं वहां यह अविद्या कभी नहीं आती हैं। उन्होंने बताया कि भगवान के बारे में कहा जाता है कि वह माखन चुराते थे परन्तु भाव यह है कि भगवान गोपियों के आमंत्रण पर उनके मन के कपट को चुराने के लिए ही जाते थे। क्योंकि जहां तक मनुष्य के मन का कपट दूर नहीं होता तब तक वह भगवान से प्रीति नहीं लगा सकता हैं। इसलिए मनुष्य को पहले अपने मन के विकारों को दूर करना होगा। तब जाकर ही प्रभु की प्राप्ति हो सकती हैं। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। मौके पर आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। जायसवाल परिवार के औंकार प्रसाद जायसवाल एवं समस्त सनातन प्रेमी भक्तजन तत्वाधान में शहर के महिला घाट गंगेश्वर महादेव शनि मंदिर परिसर नदी चौराहे पर सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को कथा के अंतिम दिवस फूलों की होली खेली जाएगी। जायसवाल परिवार और समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा का श्रवण करने की अपील की। 

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