- आज खेली जाएगी फूलों की होली, कथा का भव्य रूप से किया जाएगा समापन
कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान के जन्म के छठे दिन ही अविद्या नामक पूतना का वध किया क्यो कि जन्म से ही यह अविद्या साथ होती है। परन्तु जहां भी श्री कृष्ण का चिंतन होता हैं वहां यह अविद्या कभी नहीं आती हैं। उन्होंने बताया कि भगवान के बारे में कहा जाता है कि वह माखन चुराते थे परन्तु भाव यह है कि भगवान गोपियों के आमंत्रण पर उनके मन के कपट को चुराने के लिए ही जाते थे। क्योंकि जहां तक मनुष्य के मन का कपट दूर नहीं होता तब तक वह भगवान से प्रीति नहीं लगा सकता हैं। इसलिए मनुष्य को पहले अपने मन के विकारों को दूर करना होगा। तब जाकर ही प्रभु की प्राप्ति हो सकती हैं। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। मौके पर आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। जायसवाल परिवार के औंकार प्रसाद जायसवाल एवं समस्त सनातन प्रेमी भक्तजन तत्वाधान में शहर के महिला घाट गंगेश्वर महादेव शनि मंदिर परिसर नदी चौराहे पर सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को कथा के अंतिम दिवस फूलों की होली खेली जाएगी। जायसवाल परिवार और समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा का श्रवण करने की अपील की।

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