सीहोर : मरीह माता मंदिर में विश्व शांति और युद्ध विराम की कामना को लेकर विशेष यज्ञ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 23 मार्च 2026

सीहोर : मरीह माता मंदिर में विश्व शांति और युद्ध विराम की कामना को लेकर विशेष यज्ञ

  • अष्टमी के दिन होगी महा निशा की आरती और 27 मार्च को विशाल भंडारे का आयोजन
  • 31 सौ से अधिक देवी मंत्रों और सप्तशती पाठ के साथ स्कंद माता की पूजा-अर्चना की

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सीहोर। शहर के विश्राम घाट के पास चौसठ योगनी मरीह माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के मौके पर सोमवार को विश्व शांति और युद्ध विराम की कामना को लेकर विशेष यज्ञ अनुष्ठान आयोजित किया गया। पिछले कई दिनों से इजराइल, ईरान और अमरिका आदि देशों में युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय तनाव को देखते हुए इस आयोजन में दुनिया भर के कल्याण की प्रार्थना की गई और विशेष रूप से विश्व शांति के लिए आहुतियां दी गई। प्रतिदिन सुबह हवन और आरती का आयोजन किया जा रहा है। सोमवार को 31 सौ से अधिक देवी मंत्रों और सप्तशती पाठ के साथ स्कंद माता की पूजा-अर्चना की। मंदिर के व्यवस्थापक रोहित मेवाड़ा, गोविन्द मेवाड़ा सहित अन्य ने कन्याओं को फल का वितरण किया। कार्यक्रम के दौरान जिला संस्कार मंच की ओर से जितेन्द्र तिवारी, अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य गणेश शर्मा, सुनील चौकसे, पंडित उमेश दुबे, धर्मेन्द्र माहेश्वरी आदि शामिल थे।


प्रतिदिन माता का श्रृंगार किया जा रहा

प्रतिदिन माता का श्रृंगार किया जा रहा है। महाअष्ठमी को दोपहर बारह बजे कन्याओं को हलवा-पुड़ी, खीर के साथ प्रसादी का वितरण किया जाएगा। वहीं रात 12 बजे महानिशा आरती का आयोजन किया जाएगा। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। जिला संस्कार मंच के संयोजक मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि नवरात्रि साल में दो बार आती है एक चैत्र नवरात्र और दूसरा शारदीय नवरात्र। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बेहद महत्व है। इसके माध्यम से मां दुर्गा की पूजा की जाती है और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन का अपना खास महत्व है। हर दिन एक देवी की पूजा की जाती है। पहले तीन दिनों में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। चौथे और पांचवें दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। आखिरी चार दिनों में मां सरस्वती की पूजा की जाती है जो ज्ञान की देवी हैं। स्कंदमाता पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर मां का फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया था। चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता का पूजन होता है। भगवान शिव और पार्वती के पहले पुत्र हैं कार्तिकेय, उनका ही एक नाम है स्कंद। कार्तिकेय यानी स्कंद की माता होने के कारण देवी के पांचवें रुप का नाम स्कंद माता है। उसके अलावा ये शक्ति की भी दाता हैं। सफलता के लिए शक्ति का संचय और सृजन की क्षमता दोनों का होना जरूरी है। माता का ये रूप यही सिखाता है और प्रदान भी करता है। भगवान शिव और पार्वती के पहले पुत्र हैं कार्तिकेय, उनका ही एक नाम है स्कंद। कार्तिकेय यानी स्कंद की माता होने के कारण देवी के पांचवें रुप का नाम स्कंद माता है। उसके अलावा ये शक्ति की भी दाता हैं। सफलता के लिए शक्ति का संचय और सृजन की क्षमता दोनों का होना जरूरी है। माता का ये रूप यही सिखाता है और प्रदान भी करता है।

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