पंडित सुनील शर्मा के अनुसार रुद्र अवतार चिरंजीवी भगवान हनुमान जी का जन्मोत्सव सनातन हिंदू धर्म में अपना एक विशेष महत्व रखता है l वर्तमान कलयुग समय की अवधि में भगवान श्री राम दरबार व हनुमान जी का प्रतिदिन पूजा करने से सुख शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है और उसके समस्त प्रकार के संकट भगवान हर लेते है l शास्त्र अनुसार भगवान हनुमान जी का जन्म चैत्र मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि में हुआ था l इस बार यह अवसर 2 अप्रैल गुरुवार को हस्त नक्षत्र में रहेगा lभगवान हनुमान जी ने सत्य व धर्म के मार्ग पर चलकर सनातन धर्म को स्थापित किया और भगवान श्री राम के वनवास काल में उनकी सहायता की l भगवान हनुमान जी ने समुद को पार कर माता सीता की खोज की और अपना पराक्रम दिखाते हुए लंका में आग लगा दी और यूद्ध के समय संजीवनी बूटी की खोजकर भगवान लक्ष्मड की प्राण रक्षा की और रावण के अनेक राक्षसों को पराजित कर मोक्ष गति प्रदान की l द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के कहने पर महाभारत युद्ध में अपना अमूल्य योगदान प्रदान किया। भगवान हनुमान जी से कलयुग में मिलती है प्रेरणा- पवन पुत्र चिरंजीवी भगवान हनुमान जी ने बचपन में सूर्यदेव को लाल फल समझ कर उन्हें अपने मुख में निगल लिया था l जिससे पूरे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया था और प्राकृतिक संतुलन बिगड गया l फिर देवी देवताओं के प्रार्थना सुनकर उन्होंने सूर्य देव को अपने मुंह से मुक्त किया । देवी देवताओं ने प्रसन्न होकर उन्हें शक्तिशाली अनेक दुर्लभ वरदान प्रदान किये और नवग्रह के राजा सूर्य देव ने उन्हें शिक्षा प्रदान की l कलयुग में पवन पुत्र हनुमान जी की उपासना शक्ति प्रदाता मानी गई है हनुमान जी शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं रामायण जी में उनके आद्वितीय पराक्रम और सेवा भाव का वर्णन मिलता है भक्तों के संकट हरने के कारण ही उन्हें संपूर्ण जगत में संकट मोचन के नाम से जाना जाता है भगवान हनुमान जी ने अपने जीवन लीला के जरिए मनुष्य को सीख दी कि उसे किसी भी विपरीत परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए और धैर्य से मर्यादा पूर्ण कार्य करना चाहिए l और अपने आराध्य देवता और गुरु पर पूर्ण रूप से विश्वास करना चाहिए।
सीहोर l चिरंजीवी भगवान हनुमान जी के जन्मोत्सव के अवसर पर जिलेभर में मंदिरों में अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे l शास्त्र अनुसार भगवान हनुमान जी का जन्म चैत्र मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि में हुआ था l त्रेता युग में धर्म ध्वजा स्थापित करने दुष्ट आसुरी शक्तियों का विध्वंस करने के लिए देवादिदेव भगवान महादेव ने माता अंजनी की तपस्या से प्रसन्न होकर वानर राज केसरी के यहां कपि क्षेत्र किष्किंधा में जन्म लिया। पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं को भगवान को प्रसन्न करने के लिए लालफूल, सिदूर ,गुड़,चना,पान का बीड़ा,कैला इत्र, मिष्ठान आदि भैट करना चाहिए और दिनभर राम राम सीता राम का जाप करें l श्री रामचरितमानस, सुंदरकांड,श्री राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण,हनुमान अष्टक का पाठ करने से मनुष्य को विशेष फल की प्राप्ति होती है और नवग्रह पीड़ा और साडेसाती से मुक्ति मिलती है l उक्त पर्व दान पुण्य के लिए विशेष महत्व रखता है इसलिए गौ सेवा,जरूरतमंदों को अन्य वस्त्र दान करना चाहिए इस दिन किया हुआ दान व पूजा पुण्यकारी फल प्रदान करती है।

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