- सुहागन महिलओं को सुहाग की सामग्री का वितरण

सीहोर। शहर के विश्रामघाट स्थित चौसट योगिनी मरीह माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि का पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर दसवी के पावन अवसर पर यहां पर भजन-कीर्तन के साथ गरबा करने वाली करीब दो दर्जन से अधिक कन्याओं का संस्कार मंच द्वारा सम्मान किया गया। इस मौके पर मंदिर के व्यवस्थापक रोहित मेवाड़ा और मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी आदि शामिल थे। मंदिर परिसर में साल भर में आने वाली चार नवरात्रि के पावन अवसर पर माता की साधना और पूजा अर्चना की जाती है। यहां पर हर नवरात्रि पर माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इसके अलावा चैत्र और शरदीय नवरात्रि के मौके पर कन्याओं के द्वारा गरबा की प्रस्तुति दी जाती है। मंच और मंदिर के द्वारा नवमी और दसवी पर सुहागन महिलाओं को सुहाग की सामग्री का वितरण किया गया और वहीं गरबा करने वाली दो दर्जन कन्याओं को चुनरी उड़ाकर सम्मान किया गया। संस्कार मंच की ओर से मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि देवी पुराण और अन्य प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, गरबा केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि देवी शक्ति की आराधना और भक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम है। नवरात्रि के दौरान किया जाने वाला यह नृत्य आत्म-साक्षात्कार, सृजन और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का प्रतीक है। सबसे पहले माता के लिए सजाएं गएं उनके पंडालों में आरती-अर्चना के साथ आदिशक्ति मां अंबे और दुर्गा की स्तुति की जाती है। फिर गीतों के माध्यम से मां का आह्वान किया जाता है कि मां हमारे गरबों में पधारों और इस नृत्य साधना के जरिए हमारी पूजा स्वीकार करों। इसके बाद तो पैर ऐसे थिरकते है जैसे मानों मां साक्षात नृत्य की प्रस्तुति दे रही हों। पारंपरिक और रंग-बिरंगे कपड़ों में सजे-धजे बच्चे, युवा, बड़े और बुजुर्ग एक अलग ही अंदाज को प्रस्तुत करते है। घट स्थापना के बाद इस नृत्य का आरंभ होता है। जिसके लिए बड़े-बड़े पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। गरबा नृत्य में ताली, चुटकी, खंजरी, डंडा मंजीरा आदि का ताल देने के लिए प्रयोग किया जाता है। कहते है लयबद्ध ताल से देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की कोशिश की जाती है।
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