- हस्तिनापुर साहित्य उत्सव में चेतन आनंद “जयत्री सम्मान“ से सम्मानित

गाजियाबाद। बहसूमा रियासत के राजकुंवर स्वर्गीय जयकरण सिंह और राजमाता अत्रि देवी की स्मृति में पहली बार आयोजित “हस्तिनापुर साहित्य उत्सव“ में प्रसिद्ध कवि चेतन आनंद के नवीनतम ग़ज़ल संग्रह “नदी चुप है“ का लोकार्पण बिहार व केरल के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, योगगुरु स्वामी कर्मवीर महाराज, श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, लोकप्रिय विधायक नंद किशोर गुर्जर, सुविख्यात शिक्षाविद डॉ. यतीन्द्र कटारिया ने किया। इस अवसर पर चेतन आनंद को बहसूमा रियासत के ’जयत्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया। देर रात हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में डॉ. चेतन आनंद के काव्य पाठ को भी अत्यंत सराहना मिली। विशेष रूप से उनकी ये पंक्तियां बहुत सराही गईं-‘बड़ी ताजा हवाएं हैं हमेशा साथ में रखना, ये मौसम की अदाएं हैं हमेशा साथ में रखना, नसीहत, चाहतें, आशीष, नुस्खे, झिड़कियां ये सब, बुजुर्गों की दुआएं हैं हमेशा साथ में रखना। इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री सदस्य विधान परिषद वीरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक प्रशांत गुर्जर, सतवीर त्यागी, योगेश वर्मा, मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा, प्रसिद्ध शिक्षाविद योगेश मोहन गुप्ता, रामपुर रजा लाइब्रेरी व संग्रहालय निदेशक डॉ पुष्कर मिश्रा, वरिष्ठ आईएएस पवन कुमार, प्रख्यात लेखिका वैदेही तामण, संस्कार भारती के महामंत्री इंद्रपाल शर्मा, प्रख्यात रंगकर्मी प्रमोद शर्मा सहित देश की तमाम नामी हस्तियां मौजूद थीं। बता दें कि ‘नदी चुप है’ गजल संग्रह में चेतन आनंद की सौ से अधिक लोकप्रिय गजलें हैं। चेतन आनंद के अब तक चार काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें तीन गजल संग्रह ‘अल्फाज के पंछी’, ‘नीलकमल ख्वाबों क’े, नदी चुप हैं और एक दोहा संग्रह ‘छुअनें लगतीं मौत-सी’ हैं। ‘नीलकमल ख्वाबों के’ गजल संग्रह हिन्दी अकादमी दिल्ली ने प्रकाशित किया है। चेतन आनंद के दो गीत टी. सीरीज से आने वाले हैं। केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के निर्देश पर सुविख्यात रंगकर्मी अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव के निर्देशन में तैयार किये गये नाटक ‘आजादी के दीवानी दुर्गा भाभी’ और ‘क्विक सिल्वर चंद्रशेखर आजाद’ के गीत भी चेतन आनंद ने लिखे हैं। देश के कई राज्यों में आयोजित कवि सम्मेलनों में चेतन आनंद की कविताएं बड़े चाव से सुनी जाती हैं। चेतन आनंद गाजियाबाद में रहते हुए अनेक टीवी चैनलों एवं रेडियो स्टेशनों पर अपनी निरंतर काव्य प्रस्तति देते रहते हैं। उन्हें अनेक सम्मानों से सम्मानित भी किया गया है।
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