मधुबनी : बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जिला प्रशासन सख्त, पुनर्वास पर विशेष जोर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

मधुबनी : बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जिला प्रशासन सख्त, पुनर्वास पर विशेष जोर

Child-labour-madhubani
मधुबनी (रजनीश के झा), 13 अप्रैल। जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा की अध्यक्षता में कार्यालय कक्ष में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत विमुक्त कराए गए बाल एवं किशोर श्रमिकों के आर्थिक एवं सामाजिक पुनर्वास के उद्देश्य से गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य कार्य योजना 2017 के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि प्रत्येक विमुक्त बाल श्रमिक को समुचित संरक्षण एवं पुनर्वास के अवसर उपलब्ध हों। श्रम अधीक्षक ने बताया कि वर्ष 2025/26में कुल 39 बच्चों को विमुक्त करवाया गया जिनमें 31बच्चे विभिन्न स्कूलों में नामांकित है,4बच्चे अपने माता पिता के साथ दूसरे राज्य में चले गए है,4बच्चे जिले के बाहर के है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 31 दोषी नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है।

 

धावादल के कार्यों की सराहना, सुदूर क्षेत्रों में अभियान तेज करने का निर्देश

जिलाधिकारी ने श्रम संसाधन विभाग के नेतृत्व में संचालित धावादल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए यह अभियान अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि धावादल की गतिविधियों को सुदूरवर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक सघनता के साथ संचालित किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर बाल श्रम की घटनाएं छिप न सकें। साथ ही, अपर समाहर्ता को निर्देशित किया गया कि श्रम विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई विमुक्त बाल श्रमिकों की सूची का सत्यापन शीघ्र कराया जाए तथा भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर वास योग्य भूमि उपलब्ध कराई जाए, जिससे उनके जीवन स्तर में स्थायी सुधार हो सके।


सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश

बैठक में जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सिविल सर्जन, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) तथा निदेशक, DRDA को स्पष्ट निर्देश दिया कि विमुक्त बाल श्रमिकों के अभिभावकों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं खाद्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का समुचित लाभ मिलने पर ही बाल श्रम की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है।


बाल श्रम उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान पर विशेष जोर

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बाल श्रम को जड़ से समाप्त करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार, जनसंवाद कार्यक्रम तथा स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) के सहयोग से समाज के अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता संदेश पहुँचाया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि बाल श्रम केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक समस्या भी है, जिसके समाधान के लिए समाज के सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है।


समग्र विकास के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने दोहराया कि जिला प्रशासन बाल एवं किशोर श्रमिकों के पुनर्वास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा इस दिशा में सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है, और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उक्त बैठक में श्रम अधीक्षक,सहायक निर्देशक सामाजिक सुरक्षा,पुलिस उपाधीक्षक सहित डीएलएसए के प्रतिनिधि,चाइल्ड हेल्पलाइन के सदस्य आदि उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं: