
मधुबनी (रजनीश के झा), 11 अप्रैल : माले नगर स्थित जिला कार्यालय में कल से शुरू हुआ भाकपा(माले) का 8वां मधुबनी जिला सम्मेलन का आज 7 स्थायी आमंत्रित समेत 28 सदस्यों की जिला कमेटी और जिले के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता का. ध्रुव नारायण कर्ण को पुनः जिला सचिव चुनने के साथ सफलतापूर्वक समापन हो गया. सम्मेलन की उद्घाटन सत्र को भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो के सदस्य और खेग्रामस के राष्ट्रीय महस्डचिव धीरेन्द्र झा, केंद्रीय कमेटी के सदस्य और समकालीन लोकयुद्ध के संपादक संतोष सहर, भाकपा(माले) की राज्य स्थायी समिति के सदस्य और दरभंगा जिला सचिव बैद्यनाथ यादव तथा राज्य कमेटी सदस्य अभिषेक कुमार ने संबोधित किया. कल देर शाम शुरू हुए सम्मेलन के प्रतिनिधि सत्र में जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण ने पिछले कामकाज की रिपोर्ट पेश की जिसमें जिले में भाकपा (माले ) के नेतृत्व में चले आंदोलनों और प्रदेश की भाजपा-जदयू सरकार के खिलाफ चले अभियानों की विस्तृत चर्चा करने के साथ ही मधुबनी जिले में भाकपा(माले) के विस्तार करने व मजबूत बनाने के सवाल पर विचार किया गया था. जिले के लगभग सभी प्रखंडों से जुटे 150 से भी अधिक प्रतिनिधियों ने जिनमें महिलाएं व छात्र-युवा भी शामिल थे, इसपर चर्चा करने के बाद सर्वसम्मति से पारित किया. प्रतिनिधि सत्र को जोगनाथ मंडल,विजय कुमार दास,नवल किशोर यादव, बिशंभर कामत, भूषण सिंह, श्याम पंडित, मदनचंद्र झा, लक्ष्मण राय, कामेश्वर राम, शिव शक्ति देवी आदि जिले के वरिष्ठ नेताओं के साथ दो दर्जन से भी अधिक कायकर्ताओं ने भी संबोधित किया. लक्ष्मण राय की अगुआई में गठित एक पांच सदस्यों अध्यक्ष मंडल ऊत्तीम पासवान, भूषण सिंह,श्याम पंडित, मदन चंद्र झा ने सम्मेलन का संचालन किया. सम्मेलन के पर्यवेक्षक भाकपा(माले) राज्य कमेटी सदस्य अभिषेक कुमार की देखरेख में चले सांगठनिक सत्र में प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से 28 सदस्यीय जिला कमेटी का चुनाव किया. भाकपा(माले ) राज्य कमेटी सदस्य ध्रुव नारायण कर्ण पुनः सर्वसम्मति से भाकपा(माले) के मधुबनी जिला सचिव चुने गए.
जिला सम्मेलन की झलकियां
सम्मेलन ने जिले में कम्युनिस्ट पार्टी की पुरानी विरासत को शिद्दत से याद करते हुए गरीबो, दलितों, महिलाओं, छात्र-नौजवानो और मुस्लिम समुदाय समेत संघर्षशील ताकतों को भाकपा(माले) के बैनर तले एकजुट कर भाजपा के बुलडोज़र राज को खत्म करने का संकल्प लिया.
इसके साथ ही सामंती ताकतों, भू-माफियाओ और सरकार के खिलाफ संघर्ष करते हुए गरीबों के वास-आवास की लड़ाई छेड़ने का भी निर्णय लिया गया.
सम्मेलन ने कर्ज के बोझ, रोजगार के लिए पलायन, सामती अत्याचार, बाढ़ और विस्थापन, महंगाई तथा कल्याणकारी योजनाओं में व्याप्त लूट-खसोट के सवाल पर भी आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया.
सम्मेलन ने आंदोलनों में व्यापक जनता की भागीदारी कराने के साथ गांव-टोलों के तमाम गरीबों को एकजुट करने तथा उन्हें भाकपा (माले) में शामिल कर नीचे ऐसा ऊपर तक मजबूत संगठन बनाने के लक्ष्य के साथ भाकपा(माले) को जिले की अव्वल पार्टी बनाने का संकल्प लिया है.
सम्मेलन जिले में में शहीद व दिंवगत भाकपा(माले) नेताओं समेत आजादी आंदोलन व कम्युनिस्ट व सोशलिस्ट आंदोलन के नेताओं को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुआ.
सम्मेलन स्थल को चर्चित भटसिमर भूमि आंदोलन के शहीदों दया देवी और कुसुम पासवान के नाम समर्पित किया गया था.
जिले के वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता लक्षमन राय के हाथों झंदोरोहण और शहीद वेदी पर पुष्पांजलि देने के साथ शुरू हुआ सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय गीत और गगनभेदी नारों के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ.
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