जाँच दल 30 मार्च की दोपहर रोह गाँव पहुँचा। जमा मस्जिद के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती थी और पूरे इलाके में आवाजाही लगभग ठप थी। प्रवेश के दौरान पुलिस की असामान्य सतर्कता और संदेह भरी निगाहें देखी गईं। गली के अंदर आगे बढ़ने पर जगह-जगह पुलिस की टुकड़ियाँ तैनात मिलीं। एक ओर रामनवमी जुलूस का बड़ा बैनर लगाकर 8–10 लोग बैठे थे, वहीं पूरी गली में ‘जय श्री राम’ के झंडे लगे हुए थे। आसपास के सभी घरों और दुकानों के दरवाजे बंद थे, जो भय और तनाव की स्थिति को दर्शाता है। जाँच दल का स्थानीय स्तर पर कोई परिचित नहीं होने के कारण जानकारी जुटाने में कठिनाई हुई। जमा मस्जिद के पास एक पंडाल लगा मिला, जिस पर रामनवमी का बैनर लगा था। बड़ी मुश्किल से आरिफ मियाँ नामक एक व्यक्ति से बात हो सकी, जो अत्यंत भयभीत थे और उन्होंने किसी भी घटना से इनकार करते हुए कहा कि “यहाँ कुछ नहीं हुआ, झगड़ा बाजार में हुआ है।” इसके बाद जाँच दल बाजार क्षेत्र की ओर बढ़ा। पहले से उपलब्ध संपर्कों के माध्यम से मो. शाहिद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन बंद था। स्थानीय दुकानदार उमेश जी (न्यू गायत्री ट्रेडर्स) को बुलाया गया, लेकिन उन्होंने पहले बाजार आने से इंकार कर दिया। बाद में उन्होंने बाजार के पूर्वी हिस्से में मिलने को कहा, जहाँ वे मो. सज्जाद और मो. सलाम के साथ मौजूद थे। तीनों ही अत्यधिक डरे हुए थे और किनारे खड़े होकर उन्होंने जो जानकारी दी, वह बेहद गंभीर है। उनके अनुसार, 27 मार्च को बजरंग दल द्वारा प्रचार वाहन से बाजार में घूम-घूमकर यह घोषणा की गई थी कि अगले दिन सभी दुकानें बंद रहें, अन्यथा तोड़फोड़ के लिए दुकानदार स्वयं जिम्मेदार होंगे। उल्लेखनीय है कि इस प्रचार के कुछ ही मिनटों बाद पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च किया गया, जिससे आम लोगों में यह संदेश गया कि इस चेतावनी को प्रशासनिक समर्थन प्राप्त है।
28 मार्च को पूरा बाजार बंद रहा। शाम करीब 5 बजे रामनवमी जुलूस बाजार में प्रवेश किया, जिसमें प्रतिबंधित डीजे का प्रयोग किया गया और स्थानीय लोगों के अलावा आसपास के गाँवों तथा बाहरी अंजान चेहरों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी थी। जुलूस शांतिपूर्वक बाजार से गुजर गया, लेकिन जब यह मस्जिद के पास पहुँचा तो कथित रूप से मस्जिद का झंडा हटाने/उखाड़ने की घटना के बाद दोनों समुदायों के युवाओं के बीच पथराव शुरू हो गया। उस समय बाजार पूरी तरह सुनसान था। इसी स्थिति का लाभ उठाकर मो. समसीर की रेडीमेड दुकान चंदन वाटिका के साइनबोर्ड में आग लगाई गई। साथ ही सेरा सब्जी विक्रेता, सज्जाद और जावेद की मुर्गा दुकान की खाली गुमटियों में आग लगा दी गई। गुमटी में रखे प्लास्टिक सामान के पिघलने से आग पास की मो. चाँद की बंद रेडीमेड दुकान तक फैल गई। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया। बाद में रात में ही स्वच्छता कर्मियों को बुलाकर मलबा हटाया गया और घटनास्थल पर पुलिस तैनात कर दी गई। 29 मार्च की सुबह एसडीएम और एसडीपीओ द्वारा दोनों समुदायों के दुकानदारों की शांति बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही एक और गुमटी में आग लगा दी गई, जिससे भगदड़ मच गई और बैठक रद्द करनी पड़ी। इसके बाद से 30 मार्च तक पूरा बाजार बंद रहा। जाँच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद रात के समय पुलिस द्वारा घरों में घुसकर दोनों समुदायों के लोगों की गिरफ्तारी की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। यद्यपि गिरफ्तारियाँ दोनों पक्षों से हो रही हैं, लेकिन आम नागरिकों में भय और असुरक्षा की भावना गहरी है।

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