- भाषा, सुरक्षा और सुगमता का संगम—न्यास की नई व्यवस्था से बदलेगा श्रद्धालुओं का अनुभव
मंदिर के मुख्यकार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत विशेष सेवाओं—जैसे सुगम दर्शन, अभिषेक और आरती—के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ऐप के माध्यम से पंजीकरण कराना होगा। इस प्रक्रिया में आधार संख्या सहित आवश्यक विवरण दर्ज किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं का भाषाई और क्षेत्रीय वर्गीकरण संभव हो सकेगा। इसके आधार पर मंदिर परिसर में बहुभाषी प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि हर भक्त को सहज संवाद और संतोषजनक दर्शन का अनुभव मिल सके। विश्वभूषण मिश्रा के अनुसार यह व्यवस्था सिर्फ सुविधा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कदम है। सीमित अवधि तक सुरक्षित रखी जाने वाली पहचान संबंधी जानकारी से भीड़ प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि आम श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क दर्शन की वर्तमान व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होगा। काशीवासियों के लिए विशेष द्वार से प्रातः और सायंकाल होने वाले दर्शन भी पूर्ववत जारी रहेंगे। यह नई प्रणाली फिलहाल विशेष अनुरोधों और विशिष्ट सेवाओं के लिए चरणबद्ध तरीके से 1 मई 2026 के बाद लागू की जाएगी। न्यास ने स्थानीय नागरिकों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से इस नई पहल में सहयोग और सहभागिता की अपील की है। साथ ही सुझावों के लिए आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से संवाद का रास्ता भी खुला रखा गया है। काशी में यह पहल केवल व्यवस्था का बदलाव नहीं, बल्कि उस परंपरा का आधुनिक विस्तार है, जहां ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ अब तकनीक भी आस्था की सहयात्री बन रही है।

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