श्री चोलकर ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि हरदा के भुणाना क्षेत्र में पहली बार आयोजित होने वाले इस उत्सव में निमाड़ की सांस्कृतिक झलक—पारंपरिक वेशभूषा, पूजा-विधि, लोकगीत, नृत्य एवं विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विशेष रूप से शामिल कर गणगौर तीज का पर्व मनाया जायेगा। इसका उद्देश्य समाज की समृद्ध परंपरा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। बैठक के दौरान महिलाओं ने भी उत्सव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए और पारंपरिक रीति-रिवाजों को प्रमुखता देने पर जोर दिया। साथ ही यह भी तय किया गया कि आयोजन में समाज के प्रत्येक परिवार की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी तथा महिलाओं, युवाओं और बच्चों को विशेष रूप से जोड़ा जाएगा। उत्सव को भव्य स्वरूप देने के लिए भव्य शोभायात्रा, माता गणगौर की आकर्षक झांकी, पारंपरिक लोकगीत-नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। आयोजन की तैयारियां अभी से प्रारंभ की जाएंगी तथा समय-समय पर बैठकें आयोजित कर समिति का विस्तार किया जाएगा। उमेश चोलकर ने बताया कि बैठक के अंत में सभी समाज बंधुओं एवं महिलाओं ने संकल्प लिया कि वर्ष 2027 में आयोजित होने वाला माता गणगौर उत्सव हरदा का एक ऐतिहासिक एवं स्मरणीय आयोजन बनेगा।
सीहोर। गुरव समाज के समाज कुछ बंधुओं द्वारा सामूहिक पहल करते हुए वर्ष 2027 में माता गणगौर उत्सव को भव्य एवं ऐतिहासिक रूप से मनाने के उद्देश्य से “गणगौर उत्सव समिति” का गठन किया गया है। उल्लेखनीय है कि मप्र के निमाड़ क्षेत्र में यह उत्सव गुरव समाजजनों द्वारा प्रतिवर्ष श्रद्धा, उल्लास एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ गणगौर तीज का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, और अब उसी परंपरा को हरदा में भी जीवंत करने का प्रयास किया जा रहा है। समाज के उमेश चोलकर ने बताया कि खेड़ीपुरा क्षेत्र में इस संबंध में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के कुछ समाज बंधु शामिल रहे जिनमे अनेक वरिष्ठजन, युवा एवं महिलाएं उत्साहपूर्वक उपस्थित हुए। बैठक में सभी की सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग से समिति का गठन किया गया। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि आगामी समय में और अधिक समाज बंधुओं को जोड़ते हुए समिति का विस्तार किया जाएगा, ताकि आयोजन को और अधिक भव्य एवं सफल बनाया जा सके।

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