- विदेशी निवेश व बीमा कानून संशोधन विधेयक नागरिकों और बीमा उद्योग के लिए बड़ा खतरा : महापात्रा
बीमा कानून संशोधन विधेयक का करेंगे विरोध
पत्रकार वार्ता में इंश्योरेंस एम्पलाइज यूनियन सचिव विजय कुमार यूनियन अध्यक्ष अंकित श्रीवास्तव उपाध्यक्ष गणेश प्रसाद साथी राकेश राठौर सुरेंद्र यादव लक्ष्मी नारायण राकेश शर्मा आदिति जैन प्रमिला शास्त्री हेमलता वशिष्ठ राजीव कुमार गुप्ता उमेश कुशवाहा बहादुर कुशल भारती राकेश राठौर उपस्थित रहे। ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन भोपाल डिवीजन इंश्योरेंस एम्प्लॉइज यूनियन के पदाधिकारियों ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज बीमा उद्योग के संबंध में भारत सरकार ने एक 'बीमा कानून संशोधन विधेयक पारित किया है, जिसे सबकी बीमा सबकी रक्षा बिल कहा जा रहा है। इसके तहत बीमा उद्योग में सौ प्रतिशत विदेशी पूंजी को न्योता देने के लिए कानून बनाया गया है। यह महासम्मेलन इस विधेयक के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित करने जा रहा है। वर्तमान में शेयर बाजार में जो हलचल है, विशेषकर पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण जो उथल-पुथल मची है, उसके बावजूद बीमा उद्योग पर कोई असर नहीं है। लेकिन इस के बाद फिर से शेयर बेचने की जो कोशिश हो रही है,हम उसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। भारत सरकार ने 44 श्रम कानूनों को खत्म करते हुए जो चार लेबर कोड अधिसूचित किए हैं,उनके खिलाफ हम पहले ही दो एक-दिवसीय हड़ताल कर चुके हैं। यदि सरकार इन्हें वापस नहीं लेती है, तो भविष्य में होने वाले व्यापक जन-आंदोलन में हम शामिल होंगे।
एनआईसी में अविलंब भर्तियां की जाएगी
चौथा महत्वपूर्ण विषय यह है कि 2020 के बाद से एक भी क्लास-& कर्मचारी की बहाली नहीं हुई है। एक तरफ द्वारा बेची जाने वाली पॉलिसियों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की संख्या घटती जा रही है। क्लास-& और क्लास-4 संवर्ग में अविलंब भर्तियां की जाएगी। इस सम्मेलन में इन सभी गंभीर मुद्दों पर विमर्श हुआ हैं भारतीय जीवन बीमा निगम के निजीकरण की राह पर सरकार जो कदम बढ़ा रही है, उन्हें वापस लिया जाना चाहिए। देश की जनता की घरेलू बचत पर निजी देशी-विदेशी पूंजी का नियंत्रण देने की कोशिश की जा रही है। एक तरफ प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारतÓ का नारा दे रहे हैं, लेकिन देश की जैसी संस्था को निजी हाथों में सौंपेंगे और इसकी परिसंपत्तियों पर से सरकार का नियंत्रण हटाकर विदेशी पूंजी के हवाले करेंगे, तो यह कैसी आत्मनिर्भरता होगी।
जनता के संसाधनों की बिक्री बंद हो
हमारी मांग है कि बीमा संशोधनों के जरिए सौ प्रतिशत का निर्र्णय वापस हो। देश के शेयरों की अतिरिक्त बिक्री रोकी जाए। नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई से बने कोल इंडिया, एयर इंडिया और हवाई अड्डों जैसे संसाधनों की बिक्री बंद हो, जो जनता की गाढ़ी कमाई से बने हैं। आज सबका साथ, सबका विकास के बजाय केवल गिने-चुने कॉरपोरेट्स का विकास हो रहा है और गरीब मेहनतकश जनता का विनाश हो रहा है। यही कारण है कि पानीपत, मानेसर और नोएडा में मजदूर सड़कों पर हैं। सिंगरौली में अडानी प्लांट की दुघज़्टना को दबाने की कोशिश और छत्तीसगढ़ में वेदांता प्लांट के बॉयलर हादसे में 20 मजदूरों की मौत यह दर्शाते है।
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