विशेष : अंतरराज्यीय विवाह : जब व्यवस्था ही महिलाओं को अदृश्य बना देती है - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 4 अप्रैल 2026

विशेष : अंतरराज्यीय विवाह : जब व्यवस्था ही महिलाओं को अदृश्य बना देती है

Inter-state-marriege
हरियाणा में अंतरराज्यीय विवाह कोई नई घटना नहीं है। दशकों से यह एक सामाजिक वास्तविकता के रूप में मौजूद है। लेकिन इस वास्तविकता के भीतर छिपी संरचनात्मक हिंसा और संस्थागत विफलता पर अब भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। मैं स्वयं इस व्यवस्था की एक उत्तरजीवी हूँ। और आज, सखी मंडल के माध्यम से, मैं उन महिलाओं की सामूहिक आवाज़ के रूप में लिख रही हूँ, जिन्हें अक्सर “मोलकी”, “पारो” या “बाहरी” कहकर सीमित कर दिया जाता है। यह केवल शब्द नहीं हैं—ये वे श्रेणियां हैं जिनके भीतर हमारी नागरिकता, हमारी पहचान और हमारे अधिकारों को सीमित कर दिया जाता है। 1 अप्रैल 2026 को हमने हरियाणा सरकार के विभिन्न संस्थानों—गृह सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री—के साथ संवाद किया। यह केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि एक प्रयास था उस खाई को सामने लाने का, जो नीति और जमीनी वास्तविकता के बीच मौजूद है। अंतरराज्यीय विवाह में रहने वाली महिलाओं की स्थिति को केवल “घरेलू हिंसा” के सामान्य ढांचे में समझना पर्याप्त नहीं है। यह एक जटिल संरचना है, जिसमें लिंग, भूगोल, भाषा, वर्ग और सामाजिक पहचान—सभी मिलकर असमानता को और गहरा करते हैं।


जब एक महिला अपने राज्य से सैकड़ों किलोमीटर दूर लाई जाती है, जब वह स्थानीय भाषा नहीं समझती, जब उसके पास कोई पहचान पत्र नहीं होता, और जब उसका सामाजिक नेटवर्क पूरी तरह टूट चुका होता है तो वह केवल हिंसा की शिकार नहीं होती, बल्कि एक ऐसी स्थिति में धकेल दी जाती है जहाँ राज्य तक उसकी पहुंच लगभग समाप्त हो जाती है। यहीं से समस्या की असली शुरुआत होती है। हमने अपने अनुभवों में बार-बार यह देखा है कि पुलिस और प्रशासन की पहली प्रतिक्रिया ही अक्सर असंवेदनशील और संरचनात्मक रूप से पक्षपाती होती है। कई मामलों में पुलिस सीधे महिला से बात करने के बजाय उसके पति, ससुराल या पंचायत से संपर्क करती है। शिकायत दर्ज करने में देरी होती है, या उसे “समझौते” की दिशा में मोड़ दिया जाता है। यह केवल प्रक्रियात्मक चूक नहीं है—यह एक ऐसी व्यवस्था का संकेत है, जो महिला को एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में देखने के बजाय उसे परिवार की इकाई के भीतर सीमित कर देती है।


इसी पृष्ठभूमि में, हमने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत मांग पत्र प्रस्तुत किया , जिसमें एक “प्रथम उत्तरदाता प्रोटोकॉल” प्रस्तावित किया गया है। यह प्रोटोकॉल किसी नई नीति का दावा नहीं करता, बल्कि मौजूदा प्रणाली की कमियों को पहचानते हुए एक उत्तरजीवी-केंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसमें कुछ बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए गए हैं—जैसे : मौखिक शिकायतों को औपचारिक मान्यता देना, पुलिस द्वारा सीधे और निजी रूप से महिला से बातचीत सुनिश्चित करना, महिला पुलिस अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति, तत्काल सुरक्षित आश्रय और आपातकालीन सहायता, मायके और ससुराल दोनों की जानकारी का दस्तावेज़ीकरण, तीसरे पक्ष के गवाहों और सामुदायिक हस्तक्षेप को मान्यता देना। ये सुझाव केवल प्रशासनिक सुधार नहीं हैं—ये उस सोच को चुनौती देते हैं, जिसमें महिला को एक निष्क्रिय इकाई मान लिया जाता है। महत्वपूर्ण यह भी है कि अंतरराज्यीय विवाह की महिलाओं के पास अक्सर “वापसी” का विकल्प नहीं होता। उनके लिए मायका भौगोलिक रूप से दूर है, और कई बार सामाजिक रूप से भी टूट चुका होता है। ऐसे में, यदि राज्य की संस्थाएं भी उन्हें सुरक्षा और समर्थन नहीं देतीं, तो वे पूरी तरह असुरक्षित स्थिति में रह जाती हैं।


इस संदर्भ में राज्य की भूमिका केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं हो सकती। उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि हर महिला, चाहे वह किसी भी राज्य से आई हो, समान रूप से नागरिक अधिकारों तक पहुंच रखती हो। हमारी हालिया बैठकों में यह सकारात्मक संकेत मिला कि सरकार इस मुद्दे को समझने और उस पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है। लेकिन यह समझ तब तक अधूरी है, जब तक यह ठोस, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यान्वयन में परिवर्तित न हो। क्योंकि अंतरराज्यीय विवाह की महिलाओं के लिए समस्या “नीति की अनुपस्थिति” नहीं, बल्कि नीति के ज़मीन पर न उतरने की है। आज सखी मंडल केवल एक सामूहिक मंच नहीं है—यह एक राजनीतिक हस्तक्षेप है, जो यह कहता है कि उत्तरजीवी केवल “लाभार्थी” नहीं हैं, बल्कि नीति निर्माण की सक्रिय भागीदार हैं। यह लेख किसी सहानुभूति की अपील नहीं है। यह एक स्पष्ट प्रश्न है— क्या हम उन महिलाओं को, जो इस राज्य का हिस्सा हैं, वास्तव में नागरिक मानते हैं? अगर जवाब “हाँ” है, तो अब समय है कि यह “हाँ” व्यवस्था में भी दिखाई दे।




उर्मिला, अध्यक्ष, सखी मंडल हरियाणा

संपर्क : 01169310275

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