सीहोर : 25 अपै्रल को निकाली जाएगी भव्य श्री लक्ष्मी नारायण शाही सवारी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

सीहोर : 25 अपै्रल को निकाली जाएगी भव्य श्री लक्ष्मी नारायण शाही सवारी

  • प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में राम चरित्र मानस पाठ का शुभारंभ, आज किया जाएगा हवन, संत माधवदास महाराज ने यज्ञशाला का किया निरीक्षण

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सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी आगामी 30 अपै्रल को शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में छह दिवसीय भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए मंदिर परिसर में दोपहर में श्री-श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत रामभूषण दास महाराज के निर्देश पर संत माधव दास महाराज के मार्गदर्शन में रामचरित्र मानस पाठ का श्रीगणेश किया गया है। वहीं बुधवार को हवन के साथ समापन किया जाएगा। मंगलवार को मुख्य यजमान श्रीमती नमिता अखिलेश राय, यज्ञाचार्य कुणाल व्यास, प्रभारी सन्नी सरदार, सुनील राय, गणेश यादव, रजत मुंदडा, बाबू बैस आदि ने संत माधव महाराज सहित अन्य के मार्गदर्शन में यज्ञशाला का निरीक्षण किया और उसके पश्चात दोपहर में लगातार 24 घंटे तक आयोजित होने वाली रामचरित्र मानस के पाठ की शुरूआत की, वहीं आगामी 25 अपै्रल को निकाली जाने वाली भव्य श्री लक्ष्मी नारायण शाही सवारी के बारे में तैयारियों को अतिम रूप देते हुए यहां पर उपस्थित महिला मंडलों की बैठक ली गई।


यज्ञ से पहले रामचरित्र मानस पाठ का महत्व

संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि यज्ञ से पहले रामचरितमानस का सुख-शांति, क्लेश के नाश और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। नियमित रूप से रामचरितमानस का पाठ करने से भगवान राम और माता सीता का आशीर्वाद बना रहता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि इसकी सहायता से साधक के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। मान्यताओं के अनुसार, रोजाना घर में रामचरितमानस का पाठ करने से हनुमान जी स्वयं उस घर के लोगों की हर विपदा से रक्षा करते हैं। साथ ही इसके पाठ से नकारात्मकता समाप्त होती है।


ऐतिहासिक शाही सवारी निकाली जाएगी

प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर कोलीपुरा की ओर से इस बाद आस्था और उत्साह के साथ भगवान नृसिंह की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इसको लेकर 25 अपै्रल से महोत्सव की शुरूआत भव्य शाही सवारी से की जाएगी। सवारी के दौरान देशभर के अनेक नागा साधु, निहंग सरदार, कलशधारी महिलाओं के अलावा 34 कोटी देवी-देवताओं के अलावा हजारों की संख्या में महिलाएं कलश लेकर यात्रा में शामिल रहेगी।

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