- भगवान शिव ने जगत के कल्याण के लिए किया मां पार्वती से विवाह-महंत डा. प्रज्ञा भारती
कथा के तीसरे दिन मंगलवार को महंत डॉ. प्रज्ञा भारती ने भगवान शिव विवाह का विस्तार से वर्णन करते हुए कहाकि सती के बाद शिव तपस्या में लीन हो गए। इसी दौरान सती ने हिमालय और मैना के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। उस समय तारकासुर नाम का एक असुर देवताओं को भयभीत कर रहा था। उसे वरदान मिला था कि उसका वध केवल शिव की संतान ही कर सकती है। देवताओं ने शिव और पार्वती के विवाह की योजना बनाई। शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा गया, लेकिन वह असफल रहे। देवताओं की विनती पर शिव विवाह के लिए तैयार हुए। शिव ने बारात में श्रृंगार की जगह शमशान की भस्म लगाई। यह संदेश था कि दुनिया के सभी श्रृंगार एक दिन समाप्त हो जाते हैं, लेकिन चिता की भस्म ही अंतिम सत्य है। शिव की बारात में देवता, दानव, गण और जानवर सभी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने इस कथा को भाव विभोर होकर सुना। भगवान शिव की बारात में भूत पिशाच भी पहुंचे। ऐसी बारात को देखकर पार्वती जी की मां बहुत डर गईं और कहा कि वे ऐसे वर को अपनी पुत्री को नहीं सौंप सकती हैं। तब देवताओं ने भगवान शिव को परंपरा के अनुसार तैयार किया, सुंदर तरीके से श्रृंगार किया इसके बाद दोनों का विवाह सम्पन्न हुआ। कथा के दौरान शिवजी के विवाह का उत्सव कथा स्थल पर धूमधाम के साथ मनाया गया।
भव्य शोभा यात्रा और राम बारात 23 अपै्रल को
श्री-श्री 108 यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे, समिति अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को कथा में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव और 23 अपै्रल को सुबह देव पूजन, हवन महाभिषेक और उसके उपरांत भव्य शोभा यात्रा राम बारात निकाली जाएगी। बस स्टैंड क्षेत्र धर्ममय हो गया है। यहां पर सुबह से देर रात्रि तक दिव्य अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। पंडित श्री कटारे ने सभी श्रद्धालुओं से यज्ञ स्थल में पहुंचकर धर्मलाभ लेने की अपील की।

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