- यज्ञ से पहले किया गया कन्याओं का पूजन, राम चरित्र मानस के पाठ का समापन किया गया
इस मौके पर संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि राम चरित्र मानस का पाठ भगवान की वंदना का प्रतीक, इस ग्रंथ की उत्पत्ति भगवान शिव के हृदय में हुई है, इसीलिए इसे मानस कहा गया है। इसका पाठ भगवान शिव द्वारा राम की स्तुति के समान है। रामचरितमानस में विष्णु हरि और शिव हर को एक समान मानकर उनकी संयुक्त वंदना की गई है, जो सभी प्रकार के भय और क्लेशों को दूर करती है। सियाराममय सब जग जानी। करहूं प्रनाम जोरि जुग पानी।। की भावना के साथ जब भक्त पाठ करता है, तो वह सृष्टि को भगवान का रूप मानकर अपनी वंदना अर्पित करता है। वहीं कन्या पूजन के दौरान, परिवार कन्याओं का अपने घरों में स्वागत करते हैं, उन्हें भोजन, उपहार और प्रार्थनाएं अर्पित करते हैं, और सच्ची विनम्रता के साथ आशीर्वाद मांगते हैं। यह अनुष्ठान भव्यता का प्रतीक नहीं है, बल्कि एक सार्थक उद्देश्य का प्रतीक है। यह लोगों को याद दिलाता है कि कन्याओं को आश्रित नहीं, बल्कि शक्ति और अनुग्रह का स्रोत समझना चाहिए। पीढ़ियों से यह प्रथा प्रासंगिक बनी हुई है, अपने आध्यात्मिक सार को बनाए रखते हुए धीरे-धीरे रूपांतरित होती रही है।

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