सीहोर : युवाओं को सनातन संस्कृति और धर्म के प्रति जागरूक करना : संत माधवदास महाराज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

सीहोर : युवाओं को सनातन संस्कृति और धर्म के प्रति जागरूक करना : संत माधवदास महाराज

  • 25 अपै्रल संत समागम एवं धर्मसभा का आयोजन, शामिल होंगे महामंडलेश्वर रामभूषण दास महाराज

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सीहोर। शहर के इतिहास में पहली बार आर्यावर्त षट्दर्शन साधु मंडल भारत की राष्ट्रीय एवं प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ नृसिंह लक्ष्मी मंदिर के तत्वाधान में महाकाल/पुरी की तर्ज में निकाली जाने वाली श्री लक्ष्मी नारायण सवारी महाकुंभ कलश यात्रा को लेकर गुरुवार को मंदिर के अधिकारी संत माधव दास महाराज के मार्गदर्शन में एक बैठक का आयोजन मंदिर परिसर में किया गया। उन्होंने कहाकि युवाओं को सनातन संस्कृति और धर्म के प्रति जागरूक करना हमारा लक्ष्य है। मंदिर परिसर में बनाई जाने वाली महायज्ञ शाला पूर्ण होने वाली है। इसके अलावा यहां पर संत समागम और 26 अपै्रल से भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर मुख्य यजमान श्रीमती नमिता अखिलेश राय, यात्रा प्रभारी सन्नी सरदार, संस्कार मंच के जितेन्द्र तिवारी, पंडित पवन व्यास, पंडित कुणाल व्यास, सुनील राय, गोपाल, रजत मुंदडा, गणेश यादव, पवन केवट, मुन्ना आदि शामिल थे।


इस मौके पर संस्कार मंच संरक्षक मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि संत समाज का मार्गदर्शन कर और आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों तथा सनातन धर्म के प्रति जागरूकता फैलाकर समाज को सही दिशा दिखाते हैं। वे जातिगत भेदभाव, अंधविश्वास और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सचेत करते हुए मानवता, प्रेम और सत्य का मार्ग अपनाकर समाज के सर्वांगीण विकास में संजीवनी का कार्य करते हैं। यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि आगामी 25 अपै्रल को 26 अपै्रल को मंदिर परिसर में संत समागम एवं धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा। इसमें पितांबरा पीठधीश अनंत श्री विभूषित जगतगुरु रामानुजाचार्य रविन्द्रचार्य महाराज राष्ट्रीय संयोजक, राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर महंत श्री रामभूषण, राष्ट्रीय महामंत्री महंत मोहनदास महाराज, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत जोगेन्द्रपुरी, महंत कमलापत दास, राष्ट्रीय संगठन मंत्री महंत बाल योगेश्वर शनि महाराज, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष महंत राघवदास महाराज आदि शामिल रहेंगे। समागम के लिए यहां पर इनके ठहराने की व्यवस्था की है। साधु-संत का सभ्य समाज के निर्माण में अहम योगदान होता है। समाज को सुधारने में संतों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

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