कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने विचार एवं जिज्ञासाएं प्रस्तुत कीं। एक विद्यार्थी के प्रश्न के जवाब में श्रीमती सिंह ने कहा कि पंचायती राज के अनुभवों से हमने बहुत सीखा है और अब शिक्षा, प्रशिक्षण एवं संवेदनशीलता से ही हम सफलता प्राप्त कर सकेंगे जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे संवैधानिक उपाय हमारा मार्ग प्रशस्त करेंगे। आयोजन में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव कुमार नन्दवाना, एन सी सी अधिकारी डॉ सोमशंकर गोडाके एवं डॉ मनोज चहल ने अपनी अपनी विंग के कैडेट्स व स्वयंसेवकों सहित भागीदारी की। संवाद में प्रो रचना सिंह, प्रो बिमलेंदु तीर्थंकर, डॉ अनन्या बरुआ, डॉ एकता गुप्ता, डॉ प्रज्ञा त्रिवेदी सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालय के संकाय सदस्य उपस्थित थे। इससे पहले महाविद्यालय में पहुंचने पर महाविद्यालय प्राचार्य प्रो अंजू श्रीवास्तव, उप प्राचार्य प्रो रीना जैन, प्रशासनिक अधिकारी राजेश शर्मा, दीपाक्षी जैन सहित विद्यार्थियों ने डॉ रश्मि सिंह का स्वागत किया। प्रो श्रीवास्तव ने महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना एवं अन्य संस्थाओं द्वारा महिला एवं बाल विकास के लिए आयोजित गतिविधियों के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के अंत में महिला विकास प्रकोष्ठ की परामर्शदाता डॉ नीलम सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन में युवा वर्ग की उपस्थिति अत्यंत उत्साहप्रद एवं प्रेरक रही।
दिल्ली (रजनीश के झा)। । नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को सर्वोच्च स्तर पर निर्णय सक्षम बनाएगा। शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और प्रशिक्षण से महिलाओं को अपना स्थान बनाने में सहायता मिलेगी। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग में सचिव डॉ रश्मि सिंह ने हिन्दू कालेज में महिला विकास प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित 'संवाद' में कहा कि देश भर में पंचायती राज और स्थानीय निकायों में एक निश्चित प्रतिशत महिलाओं का सुरक्षित है जिससे हर वर्ग की महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। आयोजन में राष्ट्रिय सेवा योजना तथा एन सी सी की भी भागीदारी रही। डॉ. रश्मि सिंह ने अपने उद्बोधन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के महत्व, उसके सामाजिक प्रभाव तथा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ सिंह ने बताया कि यह अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे समाज में समानता तथा न्याय की भावना को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही उन्होंने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

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