सीहोर : भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ के समापन पर महा आरती का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 25 अप्रैल 2026

सीहोर : भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ के समापन पर महा आरती का आयोजन

  • विशाल भंडारे में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने की प्रसादी ग्रहण

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सीहोर। शहर के बस स्टैंड स्थित श्री हनुमान मंदिर समिति के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ, प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्रीराम  कथा का आयोजन किया गया था। इसके अंतिम दिवस देव पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के पश्चात दोपहर में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इस मौके पर यज्ञ संचालक श्री-श्री 108 पंडित दुर्गा प्रसाद कटारे बाबा, समिति के अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर, यज्ञाचार्य पंडित दीपक शास्त्री, पंडित अनिल शर्मा के द्वारा यहां पर आए संतों और महंतों का  स्वागत और सम्मान किया। शनिवार को कथा दोपहर में आरंभ की इस मौके पर कथा व्यास डॉ. प्रज्ञा भारती ने कहाकि माता पिता के दिए वचन और गुरु के आदर्शों पर चल कर भगवान श्रीराम आदर्श पुरुषोत्तम राम कहलाए। भगवान राम के आदर्श को अपनाकर मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। डॉ. भारती ने कहाकि अब तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में मंदिरों का जीर्णोंद्धार करने वाले पंडित श्री कटारे बाबा भगवान की सेवा का कार्य का सबसे बड़ा उदाहरण है।


ध्यान से परमात्मा की प्राप्ति संभव

यज्ञ संचालक श्री-श्री 108 पंडित दुर्गा प्रसाद कटारे बाबा ने कहाकि ध्यान से परमात्मा की प्राप्ति संभव है। ध्यान से पाप का नाश होता है। जीवन चक्र के संचित पाप को ध्यान के माध्यम से मिटाया जा सकता है। ध्यान के बाद अंदर से अग्नि प्रज्वलित होगी, जो संचित पाप को जलाकर भस्म कर देगी। सत्संग के सानिध्य से ही मानव का कल्याण संभव है। सत्संग के प्रभाव से मनुष्य में बुरे कर्मो को त्यागने की प्रवृति जागृत होती है। अच्छे कर्मों से अच्छा तथा बुरे कर्मों से बुरा फल प्राप्त होता है। इसलिये हर मनुष्य को बुरे कर्मों का त्याग कर अच्छे कर्म करना चाहिए। उन्होंने ध्यान योग की चर्चा करते हुए कहा कि मन काफी चंचल होता है। मन विषय की तरफ भागता है। जिसे कंट्रोल करने की कोशिश करनी चाहिए। शुन्यगत मन को ध्यान कहा जाता है। पांच पाप को त्याग करने से ही ध्यान संभव है। मन की चंचलता निरंतर अभ्यास करने से दूर होगा। इसलिये एक बिंदु पर दृष्टि टिकाकर एकाग्रचित्त होकर ध्यानाभ्यास किया जाता है। सत्संग की महिमा पर प्रकाश डाला एवं लोगों को संतमत के बतलाये मार्ग को अपने जीवन में अनुसरण करने की बात कही। संध्याकालीन व प्रात: कालीन सत्संग ज्ञान सभा में क्षेत्र की महिला व पुरुष सत्संग प्रेमियों ने महात्माओं के प्रवचन का श्रवण किया।


बस स्टैंड पर उमड़ा आस्था का सैलाब

शहर के बस स्टैंड स्थित हनुमान मंदिर में जारी भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ और प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन पूरी दिव्यता के साथ किया गया। इस मौके पर लगातार सात दिनों तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। 

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