- कुबेरेश्वरधाम-हनुमान प्रकटोत्सव के पावन पर्व पर स्वर्ण मिश्रित सिदूंरी चोले से कंचन वरण श्रृंगार

सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम पर आस्था और उत्साह के साथ गुरुवार को चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर संकटमोचन हनुमान का प्रकटोत्सव पर्व भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस मौके पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के निर्देश पर यहां पर मौजूद विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य ने भगवान का अभिषेक किया, साथ ही स्वर्ण मिश्रित सिंदूरी चोले से कंचन वरण श्रृंगार किया गया। यहां पर जारी विशाल भंडारे में पांच क्विंटल खीर का भोग लगाकर श्रद्धालुओं को भोजन के साथ प्रसादी का वितरण किया। इस संबंध में जानकारी देते हुए समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि हनुमान की पूजा से आत्मबल, साहस और संकट से उबरने की शक्ति मिलती है। इनकी आराधना से व्यक्ति को आत्मविश्वास, निर्भीकता और मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है। हनुमान प्रकटोत्सव पर हनुमान की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। उन्होंने बताया कि बजरंगबली की साधना करने से जीवन में आ रहे दुख-दर्द दूर होते हैं और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। चालीसा का पाठ करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।
कलियुग में रामदूत हनुमान की भक्ति का प्रताप
उन्होंने कहाकि हनुमान रुद्रावतार शिव के अवतार हैं। उनकी पूजा से भूत-प्रेत, भय, नकारात्मक ऊर्जा, मृत्यु का भय और शत्रुओं का नाश होता है। हनुमान जी निरंतर राम नाम का जाप करते हैं। जो भक्त हनुमान की शरण में जाता है, उस पर प्रभु राम की कृपा स्वत: ही हो जाती है। कलियुग के निराशावादी जीवन में, हनुमान भक्तों में उत्साह, बल, बुद्धि और साहस का संचार करते हैं। वे व्यक्ति को नैतिक रूप से मजबूत बनाते हैं। बल, बुद्धि, विद्या और साहस के धनी श्री हनुमान के जीवन से मिलने वाली प्रेरणा से हमारी संतानों को आज्ञाकारी व संस्कारों से परिपूर्ण बना सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में गुरुवार को धाम पर भंडारे का आयोजन किया गया था, जिसमें 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
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