वेंस ने कहा, ‘‘हमने कई मुद्दों पर चर्चा की लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार हों।’’ अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ‘‘काफी लचीला और सहयोगी’’ था लेकिन ‘‘दुर्भाग्य से, हम आगे नहीं बढ़ सके।’’ उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में थे। वेंस ने कहा, ‘‘हम नेक नीयत से बातचीत कर रहे थे और हम अपनी टीम के साथ लगातार संपर्क में थे। हम एक बहुत ही सरल प्रस्ताव के साथ विदा लेते हैं: आपसी सहमति का एक तरीका जो हमारा अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव है। हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘‘मुख्य लक्ष्य’’ ईरान को ‘‘परमाणु हथियार’’ हासिल करने से रोकना है और ‘‘हमने इन वार्ताओं के जरिये यही हासिल करने की कोशिश की है।’’ वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एवं सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना की और उन्हें ‘‘बेहतरीन मेजबान’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘वार्ता में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थीं। उन्होंने शानदार काम किया और हमारे एवं ईरानियों के बीच मतभेदों को पाटकर समझौते तक पहुंचने में मदद करने की वाकई कोशिश की।’’ वेंस वार्ता के बाद वाशिंगटन रवाना हो गए और उन्होंने चर्चा को आगे बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया। ईरान और अमेरिका दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा किए जाने के चार दिन बाद शनिवार को बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर भी शामिल थे जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने किया। ईरानी पक्ष में विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत अन्य लोग शामिल थे।
सूत्रों ने बताया कि विशेषज्ञ स्तर की बातचीत में आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु मुद्दों पर चर्चा हुई तथा लिखित प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि विवाद के प्रमुख मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, संपत्ति फ्रीज करना और लेबनान में इजराइली हमले के मुद्दे शामिल रहे। ईरान ने बातचीत के लिए 10 सूत्री योजना पेश की थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी बलों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांग शामिल थी। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की अगुवाई की। इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद हुई थी जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार ठप पड़ गए हैं और व्यापक पैमाने पर व्यापार प्रभावित हुआ है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी ‘एक्स’ पर एक संदेश में पुष्टि की कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके और ‘‘दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों’’ का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने लिखा, ‘‘पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दे, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंध हटाने और ईरान के खिलाफ एवं क्षेत्र में युद्ध की पूर्ण समाप्ति सहित वार्ता के मुख्य विषयों के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता विरोधी पक्ष की गंभीरता एवं सद्भावना, अत्यधिक मांगों और अनुचित आग्रहों से परहेज करने तथा ईरान के वैध अधिकारों एवं हितों को स्वीकार करने पर निर्भर करती है।’’ बकाई ने वार्ता की मेजबानी करने और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में किए गए सद्भावनापूर्ण प्रयासों के लिए ‘‘पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य की सरकार और गर्मजोशी से भरे उसके नेक लोगों’’ के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

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