प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से यह मांग अकर्ता हूं कि इस मामले की जांच न्यायालय के निगरानी में सीबीआई को सौंपे तो नीतीश कुमार के शासन काल में अधिकारियों के धन उगाही मॉड्यूल का पर्दाफाश होगा। 52 करोड़ के सर्किल रेट पर खरीद की गई जमीन की डीड का वास्तविक बाजार कीमत 400करोड़ रुपये से कम नहीं होगा और वें कौन से अधिकारी जो इसके माध्यम से ठेकेदारों से लेन देन करते थे, यह जांच का विषय है। रिशु श्री कई अधिकारियों के बेटे बेटियों के कंपनी में निवेश करता था और वो किन अधिकारियों और नेताओं से रोजाना संपर्क में था इसको भी सार्वजनिक करने की आवश्यकता हैं। रिशु श्री प्रकरण नीतीश कुमार के शासन काल का सबसे बड़ा ठेका मैनेज करने का खेल था और इस मामले में बड़े बड़े अधिकारी संलिप्त हैं। आम जनता के टैक्स के पैसोंका अधिकारी और रिशु श्री जैसे दलाल मिलकर वारे न्यारे करते रहें और नीतीश सरकार सोई रही। अब देखना है कि वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी क्या इस मामले की जांच करते हैं या वो भी इसे ठंडे बस्ते में डाल देंगे?
पटना (संवाददाता), 28 मई । ठेका मैनेज करने और अधिकारियों के साथ ठेकेदारों की मध्यस्थता का किंग पिन रिशु श्री घोटाले के मामले की जांच उच्च न्यायालय के निगरानी में सीबीआई द्वारा करने की मांग प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने की है। उन्होंने कहा कि जेल में बंद आईएएस अधिकारी संजीव हंस के विभागों के टेंडर की मध्यस्थता के अलावे रिशु श्री के फोन कॉल की जांच हो तो अन्य अधिकारियों के भी काले धन खपाने के भी सुबूत मिलेंगे। रिशु श्री न केवल बिजली विभाग बल्कि अन्य कई विभागों के अधिकारियों के लिए भी मध्यस्थता करता था जिससे बड़े पैमाने पर धन की उगाही करता और अधिकारियों के साथ मिलकर उनके बच्चों की कंपनियों में निवेश करता था।

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