- इस बार होंगे दो ज्येष्ठ मास पुरुषोत्तम मास का सयोग
पुरुषोत्तम अधिक मास का महत्व - भगवान सूर्य और चंद्रमा की एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण गति में अंतर के कारण हिन्दू पंचाग में एक अतिरिक्त मास की आवश्यकता होती है इस वर्ष 2026 में अधिक मास ज्येष्ठ मास में लग रहा है l पुरुषोत्तम ज्येष्ठ मास जगत पालक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा, जप, तप, ध्यान और व्रत अनुष्ठान के लिए समर्पित है l पंडित सुनील शर्मा के अनुसार ज्येष्ठ पुरुषोत्तम अधिक मास में धर्म-कर्म, स्नान-दान, जप-तप, व्रत और उपवास अन्य मास की तुलना में अधिक फल की प्राप्ति होती है इसलिए इसे पुरुषोत्तम अधिक मास माना गया है l शास्त्र मान्यता अनुसार अधिक मास में किया गया जल तीर्थ में स्नान, गरीबों और जरुरतमंदो को किया गया दान और पूजा-तप का पुण्यफल कभी समाप्त नहीं होता है और अधिक मास में की गई पूजा विशेष पुण्यदायी होती है l अधिक मास में तीर्थ नदियों में स्नान करने मात्र से साधक के सभी दोष और पाप समाप्त हो जाते हैं और पुण्य फल की प्राप्ति होती है l
पुरुषोत्तम अधिक मास में श्रद्धालुओं के द्वारा किए जाने वाले कर्म - पंडित सुनील शर्मा के अनुसार ज्येष्ठ पुरुषोत्तम अधिक मास में प्रतिदिन साधक को भगवान विष्णु की पूजा और कथा का श्रवण करना चाहिए और विष्णु सहस्त्रनाम भगवान सत्यनारायण कथा का श्रवण पाठन करना चाहिए l अधिक मास में विष्णु प्रिया तुलसीजी की सेवा करते हुए संध्या के समय दीया जलाना चाहिए l ज्येष्ठ मास में यदि संभव हो तो प्याऊ बनवाना चाहिए या फिर गौमाता व पशु-पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करना चाहिए l शास्त्र अनुसार ज्येष्ठ मास में जलसेवा , अन्न सेवा बड़ी पुण्यकारी मानी गई है l अधिक मास में पुण्य की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को जल, घड़ा, आदि का दान करना चाहिए ।

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