इस अवसर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी श्री अंजनी कुमार ने कहा कि राज्य सरकार एवं विभाग द्वारा मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर मत्स्य पालन को व्यवसायिक रूप देने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि विभाग किसानों को हर संभव तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं BAIP की टीम से विवेक प्रियदर्शी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य जिले में उन्नत मत्स्य प्रजातियों का विस्तार करना तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि वे बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अधिक लाभ अर्जित कर सकें। कार्यक्रम से जुड़े किसानों ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्नत स्पॉन मिलने से मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी तथा उनकी आय में सकारात्मक बदलाव आएगा।किसानों ने मत्स्य विभाग, BAIP एवं PRADAN संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, स्वरोजगार एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस अवसर पर सौम्या श्री, सुनील कुमार सहनी, सौरव कुमार मौजूद थे।
मधुबनी (रजनीश के झा), 27 मई । मत्स्य उत्पादन एवं किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में मधुबनी में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले में वैज्ञानिक विधि से मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मत्स्य निदेशालय, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार, BAIP (बिहार एक्वाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम), जिसे गेट्स फाउंडेशन से वित्तीय सहयोग प्राप्त है, तथा PRADAN (प्रदान संस्था) के संयुक्त सहयोग से मधुबनी जिले के 5चयनित मत्स्य किसानों ने अपनी पूंजी लगाकर जयंती रोहू एवं अमृत कतला का उन्नत स्पॉन मंगवाया है। यह उन्नत स्पॉन ICAR-CIFA के अधिकृत मल्टीप्लायर के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। इस कार्यक्रम में PRADAN संस्था द्वारा किसानों को तकनीकी सहयोग एवं वैज्ञानिक मत्स्य पालन से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। जयंती रोहू एवं अमृत कतला उन्नत एवं उच्च उत्पादन क्षमता वाली मत्स्य प्रजातियां हैं, जिन्हें वैज्ञानिक चयन प्रजनन तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। इन प्रजातियों की वृद्धि दर सामान्य प्रजातियों की तुलना में बेहतर मानी जाती है, जिससे किसानों को कम समय में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होने की संभावना है। इससे जिले में मत्स्य उत्पादन को नई गति मिलने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

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