“कल तेरे न होने पर भी तेरा होना समझ आया,
सब कुछ पाकर भी सब कुछ खोना समझ आया…”
नई दिल्ली (रजनीश के झा) । ये भावुक शब्द थे विज्ञापन जगत के दिग्गज स्वर्गीय पीयूष पांडे की बड़ी बहन रमा पांडेय के, जिन्होंने राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के बाद अपने भाई को याद करते हुए भावनाएं व्यक्त कीं। विज्ञापन जगत के “गुरु” कहे जाने वाले पीयूष पांडे को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में यह सम्मान प्रदान किया। भावुक होकर रमा पांडेय ने कहा, “पीयूष को यह सम्मान उसके जीवनकाल में मिलता तो बात ही कुछ और होती। देर से मिला, लेकिन मिला उसी को, जो इसका सच्चा हकदार था।”उन्होंने आगे कहा, “पीयूष सात बहनों के प्यार और माता-पिता के आशीर्वाद के बीच बड़ा हुआ। शुरुआत में लगा था कि वह क्रिकेटर बनेगा, लेकिन वह ऐसा कलमकार निकला जिसने शब्दों और भावनाओं से पूरी दुनिया को जोड़ दिया। आज जब हम उसकी बातों और उसके काम को याद करते हैं, तब उसकी गहराई को और बेहतर समझ पाते हैं।” रमा पांडेय ने कहा कि पीयूष सिर्फ विज्ञापन नहीं बनाता था, वह ब्रांड्स को लोगों की जिंदगी का हिस्सा बना देता था। “जिस ब्रांड को वह छू देता था, वह जन-जन तक पहुंच जाता था। फैविकोल वाले कहते थे कि हम तो सिर्फ गोंद बनाते थे, ब्रांड तो पीयूष ने बनाया। कैडबरी वाले कहते थे कि हम सिर्फ चॉकलेट बनाते थे, लेकिन पीयूष ने उसमें ‘ज़िंदगी के साथ भी, ज़िंदगी के बाद भी’ जैसी मिठास और एहसास जोड़ दिए।” उन्होंने यह भी कहा कि कल का दिन उनके परिवार के लिए भावनाओं से भरा हुआ था — एक ओर अपार दुख था, तो दूसरी ओर गर्व और संतोष की अनुभूति। “जब-जब समारोह में पीयूष का नाम गूंजा, ऐसा लगा मानो उसके लिखे हर विज्ञापन का शब्द आसमान में चमकते तारों की तरह जगमगा उठा हो। कल उसके न होने पर भी उसका होना महसूस हुआ।” रमा पांडेय ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उसी समारोह में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को भी पद्मश्री सम्मान मिला। “पीयूष महिला क्रिकेट का बहुत बड़ा समर्थक था। हरमनप्रीत कौर को सम्मानित होते देखना हमारे लिए एक और सपने के पूरा होने जैसा था।”

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