- बिहार में मत्स्य क्रांति को नई दिशा देगा कृषि अनुसंधान परिषद पटना एवं कॉफेड का ऐतिहासिक समझौता
उन्होंने बिहार में सजावटी (ऑर्नामेंटल) मत्स्य पालन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं व्यावसायिक उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल दिया। साथ ही मछली, मखाना एवं सिंघाड़ा की एकीकृत खेती पर अनुसंधान को प्राथमिकता देने तथा मत्स्य किसानों के लिए ऋण सुविधा एवं जलाशयों के पट्टा (लीज) आवंटन की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने की आवश्यकता भी बताई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि संस्थान एवं कॉफेड के संयुक्त प्रयासों से बिहार के मत्स्य किसानों और मत्स्यजीवियों तक नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों, अनुसंधान उपलब्धियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा नवाचारों का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी मत्स्य एवं मखाना आधारित कृषि-उद्यमों के सतत एवं व्यावसायिक विकास को नई गति देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती ने मत्स्य अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि संस्थान एकीकृत मत्स्य पालन, झींगा पालन, बायोफ्लॉक तकनीक, अजोला उत्पादन, सजावटी मत्स्य पालन, बैकयार्ड हैचरी, राज्य मछली मांगुर के संरक्षण एवं संवर्धन, उन्नत मत्स्य प्रजातियों के प्रसार, आर्द्रभूमि विकास, केज कल्चर तथा किसानों एवं मत्स्यजीवियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।
बिहार सरकार के कृषि विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार ने कृषि विभाग द्वारा विकसित डिजिटल कृषि ऐप एवं किसानों तक तकनीकी सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। वहीं, आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव श्री पंकज कुमार कमल ने कहा कि मत्स्यजीवी समुदाय राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आपदा प्रबंधन व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के सशक्तीकरण से राज्य की आपदा सहनशीलता और सामुदायिक लचीलापन दोनों को मजबूती मिलेगी। बैठक में कॉफेड के अध्यक्ष श्री प्रयाग साहनी, प्रबंध निदेशक श्री ऋषिकेश कश्यप, निदेशक श्रीमती शिमरॉन, संस्थान के वैज्ञानिकों सहित लगभग 45 मत्स्यजीवियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के अनुसंधान प्रक्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें मत्स्य एवं संबद्ध क्षेत्रों में विकसित नवीन तकनीकों, अनुसंधान परियोजनाओं तथा प्रदर्शन इकाइयों का अवलोकन कराया गया। भ्रमण के दौरान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. तारकेश्वर कुमार एवं श्री सुरेन्द्र कुमार ने प्रतिभागियों को विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों एवं तकनीकी नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

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