वाराणसी : जब काशी में गूंजा शिवस्वराज का जयघोष, राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा हिंदू साम्राज्य दिवस - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 28 जून 2026

वाराणसी : जब काशी में गूंजा शिवस्वराज का जयघोष, राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा हिंदू साम्राज्य दिवस

  • छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की गौरवगाथा का हुआ स्मरण, घोष वादन, वीर रस और ऐतिहासिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुआ आयोजन

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। हिंदू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की गौरवशाली स्मृति को संजोते हुए रविवार को कामाख्या नगर स्थित मोहिनी देवी रुंगटा शिशु मंदिर, महमूरगंज में 'हिंदू साम्राज्य दिवस उत्सव' श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। पूरे आयोजन में शिवाजी महाराज के अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा और स्वराज के संकल्प को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की। आयोजन का शुभारंभ अनिल जी के नेतृत्व में घोषवादकों द्वारा प्रभावशाली घोष वादन से हुआ। विशेष आकर्षण यह रहा कि प्रस्तुत धुनें उन घोष रचनाओं पर आधारित थीं, जिनका प्रयोग छत्रपति शिवाजी महाराज के समय उनकी नौसेना में किया जाता था। घोष की गूंज ने उपस्थित जनसमूह को मराठा साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास की स्मृतियों से जोड़ दिया। इसके पश्चात कुशाग्र जी ने वीर रस से ओतप्रोत कविता का प्रभावशाली पाठ किया। कविता में शिवाजी महाराज के अद्वितीय पराक्रम, मातृभूमि के प्रति समर्पण और स्वराज स्थापना के संघर्ष का सजीव चित्रण हुआ, जिसने श्रोताओं में राष्ट्रभक्ति और गौरव की भावना का संचार किया।


कार्यक्रम के अगले चरण में प्रदीप जी के संचालन में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का ज्ञान साझा किया। कार्यक्रम में नगर संचालक ओम प्रकाश जी की उपस्थिति में काशी विभाग के घोष प्रमुख विपिन जी ने अपना पाथेय प्रदान किया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेना का संगठन कर अनेक दुर्गों पर विजय प्राप्त की तथा हिंदू साम्राज्य की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी समाज की एकता, संगठन और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण उतना ही आवश्यक है, जितना शिवाजी महाराज के युग में था। उनके विचारों ने उपस्थित स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया। उत्सव का संचालन नगर कार्यवाह अंशु जी ने किया। आयोजन की व्यवस्थाओं में विवेक जी, बृज किशोर जी, राज किशोर जी और आदित्य जी ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विद्यालय के छात्र अवयान का छत्रपति शिवाजी महाराज के वेश में मंच पर उपस्थित होना रहा। उनके साथ चार अन्य विद्यार्थियों ने मराठा सैनिकों की वेशभूषा धारण कर ऐतिहासिक परिवेश को सजीव बना दिया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन केवल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय नहीं, बल्कि आज भी साहस, संगठन, स्वाभिमान और राष्ट्रसेवा की अमिट प्रेरणा है।

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