सीहोर : रामलीला का आयोजन, सीता स्वयंवर की प्रतिज्ञा पूरी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 30 जून 2026

सीहोर : रामलीला का आयोजन, सीता स्वयंवर की प्रतिज्ञा पूरी

  • बेहतरीन अभिनय से कलाकारों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया

Ramleela-sehore
सीहोर। क्षेत्रवासियों के सहयोग से प्रयागराज से शहर के प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में श्री रामायण रामलीला मंडल के तत्वाधान में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। लीलाओं का भव्य मंचन हुआ। एक-एक प्रसंग में भावपूर्ण संवाद और बेहतरीन अभिनय से कलाकारों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस मौके पर संत माधवदास महाराज, रामलीला की ओर से महंत बृजेश शर्मा, संस्कार मंच की ओर से जितेन्द्र तिवारी, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट आदि ने आरती की। रात्रि को लीला की शुरुआत उस प्रसंग से हुई, जब ऋषि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण मार्ग में एक निर्जन आश्रम में पहुंचे। वहां न तो पक्षियों का कलरव था और न ही पशुओं की चहल-पहल। श्रीराम ने आश्रम का रहस्य पूछा तो विश्वामित्र ने बताया कि यह गौतम ऋषि का आश्रम है, जिनकी पत्नी अहिल्या श्राप से शिला बन गई हैं। कथा के अनुसार, श्रीराम के चरण स्पर्श से अहिल्या पुन: नारी बन गईं। अहिल्या उद्धार का प्रसंग देखकर दर्शकों ने श्रीराम के जयकारे लगाए।


जनकपुर में धनुष यज्ञ मंचित हुई

जनकपुर में धनुष यज्ञ मंचित हुई। जनकपुर में निवास कर रहे राम, लक्ष्मण व मुनि विश्वामित्र को राजा अपने मंत्री को भेज स्वयंवर में आने का निमंत्रण भेजते हैं। मुनि विश्वामित्र के साथ पहुंचे श्रीराम व लक्ष्मण की शोभा देख स्वयंवर में उपस्थित समस्त राजा आश्चर्य से उन्हें देखते हैं। राजा जनक उपस्थित राजाओं के समक्ष एक बार फिर सीता स्वयंवर की शर्त दोहराते है। वहीं सुमति विमति उपस्थित राजा का परिचय देते हुए उनकी वीरता का वर्णन करते हैं। रंग भूमि में उपस्थित राक्षस राज रावण, बांणा सुर सहित अनेक राजा धनुष उठाने में असमर्थ होकर चले जाते हैं। वहीं कुछ अपना बल पौरुष दिखाकर लोगों के हंसी का पात्र भी बनते हैं। राजा जनक की टिप्पणी सुन लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। मुनि विश्वामित्र के आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष उठाने चलते हैं। सखियां श्रीराम को हाथों धनुष टूटने की भगवान गणेश से प्रार्थना करती हैं। महारानी सुनयना एक बालक के हाथों धनुष तोड़े जाने में संदेह जताती हैं। शर्त रखने के लिए राजा जनक को कोसती हैं। सीता मन ही मन स्तुति करती हैं। इस बीच धनुष की प्रत्यंचा खिंचते ही वह तीन खंडों में विभक्त हो जाता है। मंगल गीत के बीच सीता जयमाला लेकर रंगभूमि में आती हैं। 

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