पटना : खेत बचाओ अभियान के तहत अमौर प्रखंड के दो गांवों में जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 11 जून 2026

पटना : खेत बचाओ अभियान के तहत अमौर प्रखंड के दो गांवों में जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

Save-farm-farmer-training
पटना । कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा दिनांक 11 जून, 2026 को “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड स्थित पोठिया एवं मछहट्टा गांवों में किसानों के लिए जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, खरीफ फसलों की वैज्ञानिक खेती, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादन, लाभप्रदता एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना था।


कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण की अनुशंसाओं के अनुसार ही करें तथा रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग को अपनाएं। विशेषज्ञों ने हरी खाद, जैव उर्वरकों, कम्पोस्ट तथा गोबर की खाद के वैज्ञानिक उपयोग एवं प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इनके नियमित उपयोग से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि होती है तथा कृषि उत्पादन लागत को कम किया जा सकता है। उन्होंने ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग एवं स्थानीय जैविक संसाधनों के समुचित प्रबंधन के माध्यम से मृदा उर्वरता बढ़ाने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर फसलों की उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी, फसल सुरक्षा उपायों तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की आधारशिला है। इसलिए किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक खादों एवं जैव उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप कृषि कार्यों को अपनाना चाहिए।


कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया के वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार एवं डॉ. संगीता मेहता तथा आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के श्री अभिषेक कुमार, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी (प्रक्षेत्र/कृषि क्षेत्र) उपस्थित थे। उन्होंने किसानों से अपील की कि फसलों में किसी भी प्रकार के कीट, रोग अथवा पोषण संबंधी समस्या दिखाई देने पर तत्काल कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें तथा कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित तकनीकी कार्यक्रमों और परामर्श सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाएं। कार्यक्रम में कृषि विभाग के कृषि तकनीकी प्रबंधक (एटीएम), प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम), जनप्रतिनिधियों तथा क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। दोनों गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में विशेषज्ञों सहित कुल 215 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कोई टिप्पणी नहीं: