वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से उत्पादन लागत कम की जा सकती है तथा फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग तथा समय-समय पर मृदा परीक्षण कराने के लिए प्रेरित किया। किसानों को प्रति बोरी यूरिया पर सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली पर्याप्त सब्सिडी के बारे में जानकारी दी गई तथा उर्वरकों के विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। वैज्ञानिकों द्वारा कृषि यंत्रीकरण की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। किसानों को बताया गया कि आधुनिक कृषि यंत्रों एवं सटीक उर्वरक अनुप्रयोग तकनीकों के उपयोग से उर्वरकों की बचत, लागत में कमी तथा उत्पादन में वृद्धि संभव है। इसके साथ ही जीरो सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर तथा अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों के लाभों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका वैज्ञानिकों द्वारा समाधान किया गया। कार्यक्रम में कुल 35 किसानों ने सहभागिता की, जिनमें 9 महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही।
पटना । "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत 08 जून 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की एक टीम ने पटना जिले के फुलवारी शरीफ प्रखंड अंतर्गत महाँगूपुर गाँव का भ्रमण किया। इस अवसर पर डॉ. प्रेम कुमार सुंदरम, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. मणिभूषण, प्रधान वैज्ञानिक तथा श्री रवि रंजन, तकनीकी अधिकारी ने किसानों के साथ संवाद कर संतुलित एवं वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।

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