विशेष : वायुमण्डलीय ट्रेफिक जाम की चपेट में यूरोप - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 8 जुलाई 2026

विशेष : वायुमण्डलीय ट्रेफिक जाम की चपेट में यूरोप

Dr-rajendra-sharma
बात थोड़ी अचरजभरी लग सकती है पर सही मायने में देखा जाएं तो योरोप जिस तरह से हीटवेव की चपेट में आया हुआ है उसका बड़ा और प्रमुख कारण वायुमण्डलीय ट्रेफिक जाम है। योरोपीय देश गंभीर हीटवेव की चपेट में हैं। इस तरह की हीटवेव का कारण ओमेगा ब्लॉक की स्थिति होती है। दरअसल योरोप के वायुमण्डल में हीट डोम बनने के कारण ऐसा हुआ है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि सामान्य रुप से हवाएं पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हुए आगे बढ़ती है। ओमेगा ब्लॉक की स्थिति में यह हवाएं उत्तर और दक्षिण की ओर मुड़कर ग्रीक शब्द ओमेगा का आकार बना लेती है और इस तरह से वायुमण्डल में ट्रेफिक जाम के हालात हो जाते हैं। इस कारण से आसमान साफ हो जाता है, गर्म हवाएं क्षेत्र विशेष में फंस जाती है और सूरज की किरणें सीधे उस इलाकें में पड़ने लगती है और इस कारण से तेज गर्मी अपना असर दिखाने लगती है। इसी कारण से हीटवेव का असर अधिक हो जाता है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि सामान्यतः यह हालात दो तीन दिन या सप्ताह तक रह सकते हैं पर इस बार योरोप में यह दौर लंबा चला है। इससे योरोप के इंग्लैण्ड, फ्रांस, इटली, जर्मनी सहित करीब 23 देश प्रभावित हुए हैं।


आस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी और सिड़नी यूनिवर्सिटी की नेचर पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने छह बड़े हीटवेवों का अध्ययन किया है। जलवायु परिवर्तन, नमी बढ़ने गगनचुंबी इमारतों में तापमान रोधक सामग्री का उपयोग ना के बराबर होने और सुविधा के नाम पर इलेक्ट्रोनिक उत्पादों के अत्यधिक उपयोग से वातावरण प्रभावित हो रहा है। सामान्यतः यह माना जाता है कि अधिक गर्मी बच्चों और बुजुर्गो के लिए जानलेवा तक हो जाती है पर इस बार की हीटवेव अपना रौद्र रुप दिखा रही है। दरअसल योरोपवासी इतनी गर्मी के आदी भी नहीं है। इसके साथ ही हीटवेव का असर इतना अधिक है कि शरीर स्वयं अपनेआपको तापमान अनुकूल भी नहीं बना पर रहा है।


ओमेगा ब्लॉक के कारण योरोप में हीटवेव के चलते हालात यहां तक खराब हो गए कि सड़कों की डामर पिघल गई, रेल की पटरियां टेड़ी-मेड़ी हो गई। इससे ही हालात की गंभीरता को समझा जा सकता है। इसके कारण यातायात तक बाधित हो गया है। हीटवेव के कारण जंगलों में आग के समाचार आम हो रहे हैं तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हालात के चलते चेतावनी जारी की है। योरोप के देशों में तापमान 40 सेल्सियस से अधिक पहुंच गया और इससे जनजीवन तक बुरी तक प्रभावित हो गया है। देखा जाएं तो योरोप का मौसम संतुलन तक बिगड़ गया है। हांलाकि प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़-छाड का परिणाम समूचा विश्व भुगत रहा है। तापमान में बढ़ोतरी वैश्विक है पर योरोप में इस बार हीटवेव के हालात अधिक गंभीर हो गये हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो हीटवेव के कारण योरोप में एक तरह से हेल्थ इमरजेंसी के हालात बन गए और तेज गर्मी के कारण मौसम जनित बीमारियों और हीटवेव के चपेट में आने से हजारों लोगों को जीवन से हाथ धौना पड़ा है।


प्रकृति की इस नाराजगी का असर अब गंभीरता से सामने आ रहा है। जनजीवन जहां अस्तव्यस्त हो रहा हैं वही विश्लेषकों की माने तो योरापीय देशों की अर्थव्यवस्था पर आज के हालात में 11 लाख करोड़ का असर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है वहीं 2030 तक 61 लाख करोड़ का नुकसान भुगतने के लिए योरोप को तैयार रहना होगा। सीधी सी बात है कि यह प्राकृतिक प्रकोप कोई एक दिन की देन नहीं है। हालात को देखते हुए योरोपीय देशों में एयर कण्डीशनर जैसे उपकरणों की अत्यधिक मांग बढ़ी है। यहां तक कि इंग्लैण्ड में 300 फीसदी से अधिक तो फ्रांस में हजार फीसदी तक मांग बढ़ गई है। इसके साथ ही तापमान नियंत्रित करने वाले अन्य उपकरण फ्रीज आदि की मांग बढ़ी है। सीधे सीधे देखा जाए तो हीटवेव का असर जहां सीधे तौर पर स्वास्थ्य पर पड़ता है वहीं पूरी इकोनोमी को तहस नहस करने या प्रभावित करने में हीटवेव की भूमिका रहती है। खेती किसानी प्रभावित होगी, आधारभूत संरचनाओं में जिस तरह से सड़कों के उघड़ने के समाचार आ रहे हैं और रेल पटरियांं पर असर पड़ रहा है वह सामने है। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने के साथ ही हीटवेव के कारण हालात सबकुछ ठहर जाने जैसे हो जाते हैं।


ऐसा नहीं है कि ओमेगा ब्लॉक पहलीबार बन रहे हो बल्कि ओमेगा ब्लॉक पहले भी बनते रहे हैं पर एक और जिस तरह से धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और जिस तरह से ग्लेशियरों की पिघलने की गति तेज हुई और प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है उसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। अब ओमेगा ब्लॉक की अवधि बढ़ती जा रही है। इसका प्रभाव पहले से अधिक गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में कहीं ना कहीं गंभीर प्रयास करने होंगे ताकि इस तरह के हालात ना हो। हमें इस तरह के हालात बनाने होंगे जो प्रकृति अनुकूल हो। अन्यथा पृथ्वी पर जीवन को ही संकट में ड़ालने की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह मानव सभ्यता के लिए गंभीर चुनौती से कम नहीं हैं। वैज्ञानिक तो यहां तक कहने लगे हैं कि भविष्य में दो से तीन डिग्री तापमान में बढ़ोतरी भी गंभीर संकटवाली होगी।






डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

स्तंभकार

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