- भगवान परशुराम शिव धनुष को खंडित देखकर काफी क्रोधित, लक्ष्मण संवाद का आयोजन

सीहोर। क्षेत्रवासियों के सहयोग से प्रयागराज से शहर के प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में श्री रामायण रामलीला मंडल के तत्वाधान में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। लीलाओं का भव्य मंचन हुआ। एक-एक प्रसंग में भावपूर्ण संवाद और बेहतरीन अभिनय से कलाकारों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस मौके पर आयोध्या से आई राम बारात का मंदिर के संत माधवदास महाराज, रामलीला के महंत बृजेश शर्मा, संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, आयुष गुप्ता आदि ने आतिशबाजी कर स्वागत किया। देर रात्रि को आयोजित रामलीला में मिथिला नरेश राजा जनक ने सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया गया, जिसमें अन्य राज्यों के राजकुमारों राजाओं को आमंत्रित किया गया। सभा में स्वयंवर के लिए निर्धारित शर्त को बताया गया। स्वयंवर की शर्तानुसार कोई भी राजा शिव धनुष का चिल्ला नहीं चढ़ा सका। अंत में गुरु विश्वामित्र के कहने पर श्री राम द्वारा शिव धनुष का चिल्ला चढ़ाकर सीता से विवाह किया। इस दृश्य के बीच में लक्ष्मण का संवाद का आयोजन किया, अयोध्या नरेश बारात सहित मिथलापुरी में पहुंचे। स्वयंवर स्थल पर पहुंचे भगवान परशुराम शिव धनुष को खंडित देखकर काफी क्रोधित होते हैं। बाद में रामा अवतार की सच्चाई जानकर वन में चले जाते हैं। अयोध्या से बरात आने के बाद जनकपुर में राम और सीता का विवाह संपन्न होता है।
प्रभु श्री राम की लीलाओं का स्मरण
संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि प्रयागराज के रामलीला मंडल के द्वारा रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर परिसर में रात्रि आठ बजे से भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर राजतिलक तक कलाकारों के द्वारा सुंदर प्रस्तुति दी जा रही है। प्रभु श्री राम की लीलाओं का स्मरण और उनका गुणगान मन को असीम शांति, आनंद और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। भगवान राम का संपूर्ण जीवन हमें धर्म, मर्यादा, त्याग, और प्रेम का मार्ग दिखाता है। उनकी लीलाओं से जुड़े कुछ प्रमुख प्रसंगों और स्थलों का स्मरण करने मात्र से जीवन में भक्ति का संचार हो जाता है।
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