- "वृक्ष आने वाली पीढ़ियों की सबसे बड़ी पूंजी" का संदेश बना अभियान का मूल मंत्र
- पूरे जिले में गूंजा 'एक पेड़ मां के नाम' का संदेश, प्रशासन से न्यायपालिका तक एक मंच पर जुटा पूरा जिला
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने वाले प्रकृति प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया। यह सम्मान केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस सोच का था जो बिना किसी अपेक्षा के धरती को हरा-भरा बनाने में जुटी है। सम्मान समारोह ने यह संदेश दिया कि समाज में परिवर्तन केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि ऐसे समर्पित लोगों की प्रेरणा से भी आता है। एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की बढ़ती चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखे जाएं। उन्होंने युवाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उधर, वृक्षारोपण का यह संकल्प केवल एक मंच तक सीमित नहीं रहा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अपने सरकारी आवास पर बेटियों के साथ पौधारोपण कर यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत परिवार से होती है। जब बच्चे अपने हाथों से पौधा लगाते हैं, तब वे केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संस्कार भी रोपते हैं। न्यायपालिका भी इस महाभियान में पीछे नहीं रही। जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने दीवानी न्यायालय परिसर में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण करते हुए जल संरक्षण को वृक्ष संरक्षण का अनिवार्य साथी बताया। उन्होंने घरों में जल बचाने के छोटे-छोटे उपायों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि प्रकृति की रक्षा केवल पेड़ लगाने से नहीं, बल्कि जल बचाने की संस्कृति विकसित करने से भी होगी।
इसी कड़ी में पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने अस्पताल परिसरों और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण कर नागरिकों से आह्वान किया कि हर पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षण देना ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है। रविवार का यह हरित अभियान एक और कारण से विशेष रहा। यहां प्रशासन, न्यायपालिका, जनप्रतिनिधि, वन विभाग, स्वयंसेवी संस्थाएं, पर्यावरणविद् और आम नागरिक किसी अलग-अलग पहचान के साथ नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी बनकर एक मंच पर दिखाई दिए। यही इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और घटते हरित क्षेत्र की चिंता में डूबी है, तब काशी ने अपने कर्म से यह संदेश दिया कि भविष्य की सबसे बड़ी विरासत ऊंची इमारतें नहीं, बल्कि ऊंचे वृक्ष होंगे। पांच हजार पौधे भले आज मिट्टी में रोपे गए हों, लेकिन यदि उनका संरक्षण हुआ तो आने वाले वर्षों में यही पौधे हजारों लोगों को शुद्ध हवा, शीतल छांव और सुरक्षित भविष्य देंगे। काशी ने रविवार को केवल वृक्षारोपण नहीं किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के नाम हरियाली का एक ऐसा संकल्प लिख दिया, जिसकी हर पत्ती भविष्य में जीवन का नया अध्याय बनेगी।
'एक पेड़ मां के नाम' से हरित भविष्य का संदेश, सीपी ने किया पौधारोपण
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने रविवार को "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत कैंप कार्यालय परिसर में पौधारोपण कर कमिश्नरेट में वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, भूमि क्षरण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान वृक्षारोपण है। उन्होंने इसे प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक बताते हुए कहा कि वृक्ष शुद्ध ऑक्सीजन, तापमान संतुलन, भू-जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और मिट्टी के कटाव को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर पुलिस लाइन सहित कमिश्नरेट के सभी थानों, चौकियों, कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक पौधारोपण किया गया। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने तथा आमजन से भी अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।


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