दरभंगा : "जल-जीवन-हरियाली दिवस" पर कार्यशाला एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

दरभंगा : "जल-जीवन-हरियाली दिवस" पर कार्यशाला एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

Tree-planting-and-workshop-darbhanga
दरभंगा (रजनीश के झा), 14 जुलाई । दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय, दरभंगा में "जल-जीवन-हरियाली दिवस" के अवसर पर "रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं जन-जागरूकता अभियान" विषय पर एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नीतेश कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता, दरभंगा थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार द्वारा पौधों में जल अर्पित कर किया गया, जो जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा वृक्षारोपण के महत्व पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों से इन अभियानों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।


कार्यक्रम का समन्वयक डॉ. आई. सी. ठाकुर, सहायक प्राध्यापक, सिविल अभियंत्रण विभाग द्वारा तकनीकी व्याख्यान दिया गया। उन्होंने अपने विस्तृत व्याख्यान में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग की आवश्यकता, संरचना, कार्यप्रणाली, डिजाइन सिद्धांत, शहरी जलभराव (Urban Flooding) की समस्या के समाधान में इसकी भूमिका, भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge), जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा बिहार सरकार के जल-जीवन-हरियाली अभियान की उपलब्धियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्षा जल संचयन न केवल जल संकट का स्थायी समाधान है, बल्कि यह सतत विकास (Sustainable Development) और जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन (Climate Change Adaptation) की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में सिविल अभियंत्रण विभाग के तृतीय एवं अंतिम वर्ष के लगभग 200 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा तकनीकी सत्र के दौरान विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय परिसर में 51 पौधों का वृक्षारोपण भी किया गया। सभी उपस्थितजनों ने पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आई. सी. ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, प्राचार्य, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी से जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में जल संरक्षण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

कोई टिप्पणी नहीं: