अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा, अनुशासन और नवाचार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यार्थियों से समर्पण, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ अध्ययन करने तथा अपने ज्ञान और कौशल से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि श्री दिनकर झा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि आज के वैश्विक और प्रतिस्पर्धी युग में सफलता केवल तकनीकी ज्ञान से नहीं, बल्कि नवाचार, नेतृत्व क्षमता, प्रभावी संवाद, टीमवर्क और नैतिक मूल्यों से प्राप्त होती है। उन्होंने अपने चार दशक से अधिक के अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, नई तकनीकों को अपनाने और चुनौतियों को अवसर में बदलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियरों के लिए विश्वभर में अपार संभावनाएँ हैं और यदि विद्यार्थी अनुशासन, ईमानदारी तथा उत्कृष्टता को अपना लक्ष्य बनाएँ, तो वे अपने संस्थान, राज्य और देश का नाम वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कॉलेज जीवन के प्रत्येक अवसर का भरपूर लाभ उठाने, अनुसंधान एवं नवाचार की भावना विकसित करने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का सदैव निर्वहन करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर DEAN Academics डॉ. शशि भूषण एवं HOD Civil श्री श्याम सुंदर चौधरी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा के साथ व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, नवाचार और सतत् सीखने की संस्कृति अपनाने पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को महाविद्यालय के उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में HOD Applied Science डॉ. आलोक कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, प्राचार्य, सभी शिक्षकों, अतिथियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल समन्वयन Prof. डॉ. एम.डी. अबुल कलाम आज़ाद द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के मारुति नंदन मिश्रा, अंकेश कुमार, डॉ. ऋतुराज तथा अजीत कुमार गुप्ता सहित अनेक शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे। तीन सप्ताह तक चलने वाले "अभ्युदय 2026" कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यक्तित्व विकास सत्र, नवाचार एवं उद्यमिता कार्यशालाएँ, संस्थान परिचय, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ तथा विभिन्न संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालयीन वातावरण से सहज रूप से जोड़ते हुए उन्हें एक सक्षम, संवेदनशील एवं जिम्मेदार इंजीनियर बनने की दिशा में प्रेरित करना है।

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