कविता : लड़की जैसी साहस नहीं - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 2 अगस्त 2026

कविता : लड़की जैसी साहस नहीं

Neema-gadhiya
हर कठिनाई को पार कर,

नई उम्मीदें दिल में लिए,

सपने पूरे करने चली है वो,

दुनिया ने रोका-टोका उसे,

लड़की है तू लड़का नहीं,

पर वो एकदम मौन रही,

और कहीं रुकी नहीं,

एक नया उदाहरण बनी,

अपने गाँव की शान बनी,

जो कहते थे उससे कभी,

ये सब तेरे बस की नहीं,

आज वही सब कहते हैं,

लड़की हो तो उसके जैसी,

उसके जैसी साहस नहीं।।




नीमा गढ़िया

कक्षा - 12th

गाँव - पोथिंग, उत्तराखंड


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