कविता : पहाड़ की बेटी के सपने - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 2 अगस्त 2026

कविता : पहाड़ की बेटी के सपने

Ruchi
गाँव की मिट्टी से उठी एक आस हूँ मैं,

पहाड़ जैसा इरादे अटल हैं मेरे,

सपने बड़े हैं और इरादे पक्के हैं मेरे,

बचपन बीता है मेरा संघर्षों में,

कभी फटी किताबों में तो कभी कलम न होने में,

पर आँखों में था कामयाब होने का ख्वाब मेरा,

कुछ कर गुजरने का जुनून पक्का है मेरा,

बारहवीं में हूँ आज, कलम है हथियार मेरा,

किताबें मेरी दोस्त और परिवार सपना मेरा,

गांव की मिट्टी ने सिखाया है लड़ना,

गिरकर भी हर बार है मुझे उठना,

एक दिन कामयाब मैं भी होंगी,

गाँव का नाम मुझसे भी रोशन होगा,

कह दूँगी दुनिया से हँसकर तब मैं भी,

पहाड़ की बेटियां भी किसी से कम नहीं होतीं।।




रुचि

गाँव - सन, उत्तराखंड

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