फिर क्यों समाज उसे कहता लाचार है?
नवरात्रि में पूजते हो तुम जिस नारी को,
जन्म लेने पर क्यों बोझ समझते हो उसी को?
‘पराया’ कहकर उसके सपनों को मत बाँधो,
बेटी को डर नहीं, उड़ने का आसमान दो,
याद रखो, उसी से सृष्टि का पूरा विस्तार है,
बेटी ही तो आने वाले कल का आधार है।।
गुड़िया कपकोटी
सैलानी, उत्तराखंड
टीम गांव की आवाज

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