कविता : बेटी से क्यों डरता है समाज? - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 15 अगस्त 2026

कविता : बेटी से क्यों डरता है समाज?

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नारी शक्ति है, वह दुर्गा का अवतार है,

फिर क्यों समाज उसे कहता लाचार है?

नवरात्रि में पूजते हो तुम जिस नारी को,

जन्म लेने पर क्यों बोझ समझते हो उसी को?

‘पराया’ कहकर उसके सपनों को मत बाँधो,

बेटी को डर नहीं, उड़ने का आसमान दो,

याद रखो, उसी से सृष्टि का पूरा विस्तार है,

बेटी ही तो आने वाले कल का आधार है।।




गुड़िया कपकोटी

सैलानी, उत्तराखंड

टीम गांव की आवाज

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