- कांवड़ यात्रा में दिखा शिवभक्ति और देशभक्ति का अद्भुत संगम, बोलबम के जयकारों के साथ गूंजा राष्ट्रभक्ति का जयघोष
तिरंगा लेकर बोलबम के जयकारों के साथ बढ़े श्रद्धालु
महाराष्ट्र के जलगांव से पहुंचे सतीश, ममता दीदी सहित एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने सीवन नदी घाट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पवित्र जल भरा। इसके बाद तिरंगा लेकर कांवड़ यात्रा प्रारंभ की। श्रद्धालु हर-हर महादेव और बोलबम के जयघोष के साथ करीब 11 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। कांवड़ में तिरंगा लगाकर निकले श्रद्धालुओं ने सावन के धार्मिक वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग से भी सराबोर कर दिया। स्वतंत्रता दिवस के आसपास निकली इस यात्रा में देश के प्रति सम्मान और भगवान शिव के प्रति आस्था का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कुबेरेश्वरधाम पहुंचने पर हुआ स्वागत
सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक पहुंचने वाले महाराष्ट्र के शिवभक्तों का विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सेवादारों ने स्वागत एवं सम्मान किया। इस दौरान श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी भी वितरित की गई।
सावन शिवरात्रि पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, भगवान का विशेष श्रृंगार
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन मास में लाखों की संख्या में श्रद्धालु कांवड़ लेकर आस्था और उत्साह के साथ कुबेरेश्वरधाम पहुंच रहे हैं। बुधवार को सावन शिवरात्रि के अवसर पर धाम में सुबह विशेष पूजा-अर्चना की गई। कुबेरेश्वरधाम परिसर में स्थित मुरली मनोहर मंदिर में विराजमान भगवान शिव-पार्वती, भगवान राम-सीता तथा भगवान कृष्ण-राधा का विशेष श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना की।
17 और 25 अगस्त को फिर निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा
आगामी 17 अगस्त और 25 अगस्त को सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक भव्य कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। इन यात्राओं में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विश्वभर से शिवभक्तों के शामिल होने की संभावना है। कांवड़ यात्रियों की सुविधा को देखते हुए शहर से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक अनेक स्थानों पर सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। इनमें श्रद्धालुओं के लिए भोजन, फलाहारी प्रसादी, पेयजल, चाय और नाश्ते की निशुल्क व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन और समिति की ओर से भी कांवड़ यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को लेकर लगातार व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वहीं विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा जगह-जगह प्रसादी के स्टॉल लगाकर सेवा कार्य किया जा रहा है। सावन के अंतिम चरण में होने वाली इन कांवड़ यात्राओं को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह का माहौल बना हुआ है।

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