वाराणसी : काकोरी के अमर शहीदों को काशी का नमन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 8 अगस्त 2026

वाराणसी : काकोरी के अमर शहीदों को काशी का नमन

  • हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत सर्किट हाउस में सजी ऐतिहासिक प्रदर्शनी, पुष्पांजलि के साथ गूंजा राष्ट्रगान
  • लोकगीत और बिरहा के स्वरों में जीवंत हुई क्रांति की गाथा, बच्चों ने जाना स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास

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वाराणसी (सुरेश गांधी). काशी की सांस्कृतिक आत्मा ने शनिवार को एक बार फिर स्वतंत्रता संग्राम के अमर अध्याय को अपनी स्मृतियों में जीवंत कर लिया। 9 अगस्त 1925 के ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर सर्किट हाउस परिसर राष्ट्रभक्ति, श्रद्धा और इतिहास चेतना के विराट मंच में बदल गया। हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत आयोजित भाव एवं दिव्य प्रदर्शनी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम में शहीदों के प्रति ऐसा भाव प्रवाहित हुआ मानो काकोरी की क्रांति आज भी भारत की आत्मा में धधक रही हो। प्रातः से ही सर्किट हाउस परिसर में लोगों का आना शुरू हो गया था। प्रवेश द्वार पर तिरंगों की कतारें और भीतर स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के चित्र मानो आगंतुकों का स्वागत कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने शहीद राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, शहीद अशफ़ाकउल्लाह ख़ाँ, शहीद रामप्रसाद बिस्मिल और शहीद ठाकुर रोशन सिंह सहित अन्य क्रांतिकारियों के चित्रों के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।


प्रदर्शनी में बोल उठा इतिहास

सर्किट हाउस में लगाई गई काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित प्रदर्शनी कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रही। यह केवल चित्रों और दस्तावेजों का संग्रह नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की जीवित पाठशाला बन गया था। प्रदर्शनी में प्रत्येक क्रांतिकारी के बारे में उनकी जन्म तिथि, जन्म स्थान, शिक्षा-दीक्षा, वैचारिक पृष्ठभूमि, संगठनात्मक भूमिका, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, गिरफ्तारी, मुकदमे की प्रक्रिया और दी गई सजाओं का विस्तृत विवरण अत्यंत आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीति को दर्शाते हुए यह बताया गया कि काकोरी षड्यंत्र मामले में किस प्रकार कठोर दंड दिए गए। रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्लाह ख़ाँ, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को फांसी की सजा दिए जाने का उल्लेख प्रदर्शनी का सबसे भावुक पक्ष रहा। इसके अतिरिक्त सचिंद्रनाथ सान्याल, गोविंद चरण कर, मुकुंद लाल, सचिंद्रनाथ बक्शी, जोगेश चंद्र चटर्जी और रामकृष्ण खत्री सहित अनेक क्रांतिकारियों के संघर्ष और सजाओं का भी विस्तार से वर्णन किया गया।


हस्ताक्षरों में दिखी क्रांति की धड़कन

प्रदर्शनी में कुछ क्रांतिकारियों के मूल हस्ताक्षरों की प्रतिकृतियां, ऐतिहासिक पत्र, मुकदमे से जुड़े दस्तावेज और दुर्लभ छायाचित्र भी प्रदर्शित किए गए। इन दस्तावेजों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग ठहरते रहे। युवा पीढ़ी के लिए यह अनुभव इतिहास की पुस्तक से निकलकर सीधे आंखों के सामने खड़े हो जाने जैसा था। कई विद्यार्थियों ने नोट्स बनाए और अपने शिक्षकों से प्रश्न पूछे।


शिक्षा, साहित्य और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम

प्रदर्शनी का एक विशेष खंड क्रांतिकारियों की शिक्षा-दीक्षा और व्यक्तित्व विकास को समर्पित था। इसमें बताया गया कि अनेक क्रांतिकारी उच्च शिक्षित, साहित्य प्रेमी और गहन वैचारिक चेतना से संपन्न युवा थे। उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं, परिवार और भविष्य की चिंता छोड़कर राष्ट्र को सर्वोपरि माना। यह खंड विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना रहा।


लोकगीतों में गूंज उठा बलिदान का स्वर

सभागार में आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। लोकगीत एवं बिरहा गायकों ने शहीदों की वीरता, त्याग और बलिदान पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। उनके स्वरों में काकोरी के वीरों की क्रांति की पुकार जीवंत हो उठी। एक क्षण ऐसा भी आया जब पूरा सभागार मौन होकर गीतों के माध्यम से शहीदों की स्मृति में डूब गया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का सम्मान किया।


बच्चों की आंखों में चमका इतिहास

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं शामिल हुए। बच्चों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर शहीदों के जीवन, संघर्ष और बलिदान के बारे में जानकारी प्राप्त की। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी में देशभक्ति, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना के संस्कार विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने पहली बार काकोरी आंदोलन के बारे में इतनी विस्तार से जाना।


जनप्रतिनिधियों ने किया शहीदों का वंदन

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्य, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) धर्मेंद्र सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष राम सकल पटेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरी, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि काकोरी के वीरों का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर है और उनका जीवन आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।


काकोरी: अंग्रेजी सत्ता को दी गई खुली चुनौती

वक्ताओं ने कहा कि 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने को ले जा रही ट्रेन को काकोरी स्टेशन के निकट रोककर अंग्रेजी शासन को खुली चुनौती दी थी। यह घटना केवल सरकारी धन की जब्ती नहीं थी, बल्कि औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध संगठित क्रांतिकारी चेतना का उद्घोष थी। काकोरी कांड ने पूरे देश में स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी और युवाओं में बलिदान तथा संघर्ष की भावना का संचार किया।


दो मिनट का मौन और एक राष्ट्रीय संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ। उपस्थित नागरिकों ने संकल्प लिया कि शहीदों के आदर्शों, त्याग और राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जाएगा। सर्किट हाउस से लौटते समय अनेक लोगों की आंखों में श्रद्धा थी, मन में गर्व था और होठों पर एक ही भावना— काकोरी के वीर अमर रहें, भारत माता की जय।

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