- हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा तीर्थ पथ, अर्धनारीश्वर स्वरूप की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र; सावन-भादो में 50 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
अर्धनारीश्वर स्वरूप की झांकी ने खींचा ध्यान
शनिवार को हरिद्वार से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप की अनोखी झांकी लेकर श्रद्धालुओं का दल कुबेरेश्वरधाम पहुंचा। झांकी में भगवान शिव और माता पार्वती के एकत्व को बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि कांवड़ यात्रा में अर्धनारीश्वर स्वरूप की यह अनोखी झांकी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें शिव और शक्ति के संतुलन का संदेश दिया गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि अर्धनारीश्वर स्वरूप केवल शिव और शक्ति के एकत्व का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह पुरुष और प्रकृति के संतुलन तथा सृष्टि में शिव-शक्ति के महत्व को भी दर्शाता है। झांकी को सनातन संस्कृति में शिव और शक्ति के अभिन्न संबंध का संदेश देने वाली विशेष प्रस्तुति बताया जा रहा है।
काशी रवाना हुए पंडित प्रदीप मिश्रा
शनिवार को अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा आगामी 9 अगस्त से काशी में होने वाली ऑनलाइन शिव महापुराण कथा के लिए रवाना हुए। रवाना होने से पहले उन्होंने कुबेरेश्वरधाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं को भगवान शिव के नाम का जाप करने तथा श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव आराधना करने का संदेश दिया।
11 अगस्त को विश्वभर में होगा ऑनलाइन पार्थिव शिवलिंग अभिषेक
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान पर आगामी 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के अवसर पर पूरे विश्व में ऑनलाइन पार्थिव शिवलिंग अभिषेक का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालु अपने-अपने घरों में भगवान महादेव की विशेष पूजा-अर्चना और पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक करेंगे। समिति के अनुसार श्रद्धालु पिछले करीब 10 वर्षों से ऑनलाइन माध्यम से इस प्रकार की पूजा-अर्चना में शामिल होते आ रहे हैं, जिसे श्रद्धालुओं की आस्था का अनूठा और ऐतिहासिक स्वरूप बताया जा रहा है।
शिवमय हुआ सीवन तट से कुबेरेश्वरधाम तक का मार्ग
सावन मास में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या से सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक का पूरा मार्ग शिवभक्ति से सराबोर है। कांवड़ यात्रियों के साथ महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए धाम की ओर बढ़ रहे हैं। कहीं कांवड़ यात्रियों के स्वागत में सेवा पंडाल सजे हैं तो कहीं श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। पूरा तीर्थ पथ इन दिनों आस्था, सेवा, समर्पण और शिवभक्ति का संगम बना हुआ है।

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