हेमाद्रि संकल्प एवं दसविधि स्नान- पंडित सुनील शर्मा के अनुसार अनुष्ठान का प्रारंभ जिले में प्रवाहमान नदियों , पोखर, तालाब आदि क्षेत्र में हैमाद्रि संकल्प के साथ होगा। भस्म, मिट्टी, सप्त औषधि, पंचगव्य दूध दही घी गोबर गोमूत्र, दूर्वा, कुशा, फल और तीर्थ जल सहित विशेष द्रव्यों से शास्त्रीय दसविधि स्नान वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ किया जाता है । श्रावणी पूर्णिमा पर देव, ऋषि और पितृ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए तर्पण किया जाएगा एवं वेद मंत्र उच्चारित कर शिव परिवार, माता गायत्री, सप्तऋषियों आदि देवी देवताओं का हवन पूजन किया जाएगा। विप्र बंधु पुराने यज्ञोपवीत का त्याग कर माता गायत्री का ध्यान कर नवीन यज्ञोपवीत धारण करेंगे। श्रावणी उपाकर्म सनातन परंपरा में विप्र बंधुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना गया है l श्रावण पूर्णिमा को विप्रजन वेद मंत्र उच्चारित कर आत्म-शोधन की प्रक्रिया पूर्ण करेंगे। श्रावणी उपाकर्म अपने कर्तव्यों के प्रति पुनः समर्पित होने, स्वाध्याय और ज्ञान-साधना के नए संकल्प को ग्रहण करने का दिव्य पर्व है।हेमाद्रि संकल्प एवं दसविधि स्नान- पंडित सुनील शर्मा के अनुसार अनुष्ठान का प्रारंभ जिले में प्रवाहमान नदियों , पोखर, तालाब आदि क्षेत्र में हैमाद्रि संकल्प के साथ होगा। भस्म, मिट्टी, सप्त औषधि, पंचगव्य दूध दही घी गोबर गोमूत्र, दूर्वा, कुशा, फल और तीर्थ जल सहित विशेष द्रव्यों से शास्त्रीय दसविधि स्नान वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ किया जाता है । श्रावणी पूर्णिमा पर देव, ऋषि और पितृ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए तर्पण किया जाएगा एवं वेद मंत्र उच्चारित कर शिव परिवार, माता गायत्री, सप्तऋषियों आदि देवी देवताओं का हवन पूजन किया जाएगा। विप्र बंधु पुराने यज्ञोपवीत का त्याग कर माता गायत्री का ध्यान कर नवीन यज्ञोपवीत धारण करेंगे।
सीहोर । इस वर्ष भाई बहन के प्रेम समर्पण और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व और श्रावणी उपाकर्म उदया तिथि में श्रावण मास पूर्णिमा शतभिषा नक्षत्र में शुक्रवार 28 अगस्त को जिले भर में मनाया जाएगा । पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9. 11 बजे से प्रारंभ होकर 28 अगस्त को सुबह 9:50 बजे पूर्ण होगी। शुक्रवार को सर्वप्रथम देवी देवताओं व श्रवण पूजा कर रक्षा सूत्र बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा l बहन अपने भाई को मंगल तिलक कर कलाई पर राखी बांधकर सुख समृद्धि व यशस्वी जीवन की कामना करेंगि । पंडित सुनील शर्मा के अनुसार किसी भी शुभ कार्य में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है भद्रा काल में कोई भी मांगलिक शुभ कार्य नहीं किया जाता है इस बार रक्षाबंधन पर्व पर शुक्रवार को भद्रा का साया नहीं रहेगा । श्रावण मास पूर्णिमा रक्षाबंधन पर्व पर पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भारतवर्ष में नहीं दिखाई देगा इस कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा । श्रावण मास पूर्णिमा को श्रावणी उपाकर्म के पावन अवसर पर विप्रजनों के द्वारा द्वारा वैदिक रीतिरिवाज भारतीय संस्कृति के अनुरूप आत्म शुद्धि एवं ऋषि पूजन का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। श्रावणी उपाकर्म सनातन परंपरा में विप्र बंधुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना गया है l श्रावण पूर्णिमा को विप्रजन वेद मंत्र उच्चारित कर आत्म-शोधन की प्रक्रिया पूर्ण करेंगे। श्रावणी उपाकर्म अपने कर्तव्यों के प्रति पुनः समर्पित होने, स्वाध्याय और ज्ञान-साधना के नए संकल्प को ग्रहण करने का दिव्य पर्व है।

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