- रामचरितमानस ने भक्ति को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया

सीहोर। गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस के रूप में समस्त रामभक्तों को ऐसा अनुपम ग्रंथ प्रदान किया, जिसके माध्यम से भगवान श्रीराम की भक्ति, आदर्श और जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार युगों-युगों तक होता रहेगा। रामचरितमानस ने न केवल भक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाया, बल्कि हिंदी साहित्य को भी समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उक्त विचार संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बुधवार शाम सैकड़ाखेड़ी स्थित संकल्प वृद्धाश्रम में आयोजित दो दिवसीय गोस्वामी तुलसीदास जयंती समारोह के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा भक्ति सेवा समिति के तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर आश्रम में निवासरत वृद्धजनों को केंद्र के संचालक राहुल सिंह सहित अन्य लोगों ने श्रीरामचरितमानस ग्रंथ भेंट किए। कार्यक्रम में वृद्धजनों ने भजन-कीर्तन एवं धार्मिक चर्चा में भी सहभागिता की। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान श्रीरामचरितमानस है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, उनके आदर्शों और शिक्षाओं को सरल एवं सहज भाषा में जनसामान्य के सामने प्रस्तुत किया। यही कारण है कि रामचरितमानस आज भी घर-घर में श्रद्धा और आस्था के साथ पढ़ी और सुनी जाती है। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग, सेवा और कर्तव्य का संदेश देता है। तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से इन आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया।
भजन-कीर्तन से भक्तिमय रहता है वृद्धाश्रम
आश्रम निवासी रामचरण गुप्ता ने बताया कि वे लंबे समय से वृद्धाश्रम में निवास कर रहे हैं। यहां दो दर्जन से अधिक वृद्धजन नियमित रूप से सुबह और शाम भजन-कीर्तन करते हैं। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से आश्रम में सकारात्मक और भक्तिमय वातावरण बना रहता है। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने कहा कि वृद्धजनों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक साहित्य उपलब्ध कराने का उद्देश्य उन्हें भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़े रखना है। दो दिवसीय जयंती समारोह के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
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