जम्मू-कश्मीर को "सही समय" पर राज्य का दर्जा बहाल करने की केंद्र की अस्पष्ट समय-सीमा की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया की तुलना ऐसे लक्ष्य से की, जो लगातार आगे खिसकता जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह मैराथन दौड़ की तरह है। इसे 42 किलोमीटर में पूरा करने के बजाय, जब भी आप अंतिम रेखा के करीब पहुंचते हैं, वे उसे आगे खिसका देते हैं।’’ उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट मानदंड तय करने का आग्रह किया, ताकि उनकी सरकार के पास एक निश्चित लक्ष्य हो। अब्दुल्ला ने इस तर्क को भी खारिज किया कि जब तक आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में काम कर रहे सुरक्षा तंत्र पर उनकी निर्वाचित सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘इस तर्क के साथ समस्या यह है कि आप वास्तव में ऐसी सरकार को सजा दे रहे हैं, जिसकी इसमें कोई भूमिका नहीं है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद इसलिए नहीं है कि वहां निर्वाचित सरकार है। वास्तव में जम्मू-कश्मीर में इस समय जो आतंकवाद रोधी तंत्र काम कर रहा है, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।’’ उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा कहकर ‘‘आप वास्तव में यह कह रहे हैं कि जब पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद कर देगा, तब आप राज्य का दर्जा बहाल करेंगे। यानी आप यह फैसला हमारे देश की राजधानी से हटाकर इस्लामाबाद को सौंप रहे हैं।’’
प्रशासनिक कामकाज में आ रही बाधाओं को रेखांकित करते हुए अब्दुल्ला ने विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश को ‘‘विसंगति’’ बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ऊर्जा विकास निगम और शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान जैसे प्रमुख संस्थान अब भी उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में हैं। उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश से खराब शासन व्यवस्था का कोई और रूप नहीं हो सकता। कृपया केंद्र शासित प्रदेश रखें, लेकिन उन्हें विधानसभा न दें।’’ उन्होंने कहा कि उनके मंत्रिमंडल के पास अपने प्रशासनिक सचिवों का चयन करने या महाधिवक्ता की नियुक्ति करने तक का अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 370 पर अपना रुख कमजोर करने के आरोपों का जवाब देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि संवैधानिक शक्तियों के किसी भी विभाजन के लिए राज्य का दर्जा एक पूर्व कानूनी शर्त है। उन्होंने कहा, ‘‘अनुच्छेद 370 मूल रूप से केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच शक्तियों का बंटवारा था। जब आप राज्य ही नहीं हैं तो राज्य सूची कैसे हो सकती है? अनुच्छेद 370 की बहाली से पहले राज्य का दर्जा बहाल होना जरूरी है।’’ केंद्र सरकार के वादे पर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्षेत्र के अपने दौरों के दौरान व्यक्तिगत रूप से राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई थी। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य राजनीतिक आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से ‘‘मोदी का वादा’’ था।

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