मुख्य वक्ता यूनियन के केंद्रीय संयुक्त महासचिव सह इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय सह महासचिव रत्नेश वर्मा ने कहा कि नई श्रम नीति, निजीकरण, निगमीकरण, एनपीएस/यूपीएस तथा बोनस सीलिंग जैसे मुद्दों पर सरकार का रवैया कर्मचारी हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि रेलवे को टुकड़ों में बांटकर निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है, जिसका कर्मचारी संगठित रूप से विरोध करेंगे। सभा को संबोधित करते हुए मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने कहा कि पेंशन, वेतन, भत्ता, बोनस, प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति, ड्यूटी रोस्टर और विश्राम जैसी सुविधाएं कर्मचारियों का अधिकार हैं, जिन्हें रेलवे प्रशासन को स्वतः लागू करना चाहिए। मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान ने लेबर कोड की वापसी, पुरानी पेंशन बहाली तथा निजीकरण-निगमीकरण पर रोक लगाने के लिए निर्णायक आंदोलन चलाने का आह्वान किया। केंद्रीय संगठन सचिव चंदन यादव ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों पर जबरन निजीकरण और निगमीकरण थोपा जा रहा है तथा 55/30 सर्विस रिव्यू जैसी नीतियों से कर्मचारियों में असुरक्षा बढ़ी है। उन्होंने देशभर में सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग की।
कन्वेंशन को संबोधित करते हुए एआईसीसीटीयू नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि देश के मजदूरों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। ठेका मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है और चार लेबर कोड के माध्यम से श्रमिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। वक्ताओं ने रेलवे में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, आउटसोर्सिंग समाप्त करने, समान काम के लिए समान वेतन, सभी विभागों में आठ घंटे का ड्यूटी रोस्टर लागू करने, रन-ओवर दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच, रेलकर्मियों को जीवन रक्षक यंत्र उपलब्ध कराने, रेलवे अस्पतालों एवं आवासीय सुविधाओं का विस्तार, ट्रांसफर नीति में पारदर्शिता तथा विभिन्न भत्तों के समय पर भुगतान की मांग उठाई। सभा को राजकुमार, प्रेम कुमार ठाकुर, संतोष मिश्रा, प्रमोद कुमार राय, सोनू कुमार, वीरेंद्र कुमार, दीलीप कुमार, रत्न मिश्र, राजीव कुमार, अविनाश कुमार, चंदन कुमार, संतोष मिश्र, कैलाश कुमार, संगम कुमार, राज कुमार, ऐक्टू के ललन कुमार, रेल विकास मंच के राम विनोद पासवान , विश्वनाथ सिंह हजारी, सुशील कुमार, रामलाल राम, पूर्व पार्षद अर्जुन कुमार, दीनबंधु प्रसाद, शाहीद हुसैन, दीपक यदुवंशी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। कन्वेंशन के अंत में कर्मचारियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।

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