आंदोलन के दूसरे चरण में आज फेडेरेशन फोर न्यू स्टेट्स के महासचिव कमलेश कुमार झा के नेतृत्व में 2 से 5 बजे तक पृथक मिथिला राज्य के लिये धरना-प्रदर्शन किया गया जिसमें संघर्ष समिति ने बढ चढ कर हिस्सा लिया। मिथिला राज्य सेनानी एडवोकेट डा० प्रदीप झा,शिव प्रसाद साह,सविता मिश्रा, अरूण पंजियार, आनंद झा,तेज नारायण चौधरी,रवीन्द्र लाल कर्ण, , इंद्रदेव सिंह-,ईं राम बहादुर झा,भगवंत झा-, पं रविन्द्र मिश्रा,डा० पंकज पटेल, शिवधर राय, एडवोकेट नवीन झा, आनंद झा, रतीश मिश्रा,अनुपम झा, माधवी ने कहा कि मिथिला सरकारी उपेक्षा के कारण गतिहीन एवं दिशाहीन हो गया है.शिक्षा और स्वास्थ्य के स्तर में तीव्र पतन हो रहा है . 78 वर्षों में बेरोजगारी और पलायन में बेहताशा वृद्धि हुई है .सभी मिल, उद्योग- धंधे बंद हो गए हैं। प्रमुख मांगों में पृथक मिथिला राज्य, मैथिली भाषा का संरक्षण एवं संवर्धन, मिथिला के सर्वांगीण विकास के अलावा 41 सूत्री मांग है.जिसमें नेपाल में डैम बनाकर बाढ़ का स्थाई निदान , दरभंगा मे हाइकोर्ट बेंच, आईआईटी,आईआईएम, मैथिली में दूरदर्शन , पलायन और बेरोजगारी का रोकथाम, एवं आर्मी में मिथिला रेजिमेंट बनाना प्रमुख है। प्रमुख वक्ताओं में श्याम सुंदर महतो, संतोष झा, सुमन नायक, शमशूल हक, ज्ञानेन्द्र झा, मनोज कु झा, कमल रजक, कमलेश चन्द्र ठाकुर, संजय यादव, पत्रकार गौतम झा, संतोष झा, मिहिर झा, कवि बाल मुकुन्द झा थे । ग्रेटर नोएडा संयोजक मदन कुमार झा के नेतृत्व में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री को ज्ञापन दिया गया ।
नई दिल्ली, 9 अगस्त (संवाददाता) । आज अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति और मिथिला वासी के तरफ से जंतर मंतर दिल्ली पर 9 बजे से 1 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन का नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय संयोजक प्रोफेसर अमरेंद्र कुमार झा ने की जिसमें सैकङों मैथिलों ने हिस्सा लिया .बाद में धरना की अध्यक्षता डा० परमानन्द यादव और संचालन तेजनारायण चौधरी ने की.अपने सम्बोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि सनातनी मिथिला को राज्य की मांग करते हुए 120 बरस हो गया.इस भौगोलिक क्षेत्र में बंगाल से बिहार, उड़ीसा और झारखंड राज्य बन गया. मिथिला क्षेत्र लगातार बिहार से अलग होने की मांग कर रहा है । सामाजिक, भाषायी,राजनैतिक,औद्योगिक, सांस्कृतिक आजादी का एकमात्र समाधान मिथिला राज्य है। राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी ईंजीनीयर शिशिर कुमार झा ने कहा कि मैथिलों के लिए बिहारी शब्द मिथिला के नैतिक पहचान , मान- सम्मान,सभ्यता -संस्कृति, भाषा एवं विकास में बाधक है .बिहार में मैथिलों की पहचान लुप्त होती जा रही है। सरकारी उपेक्षा के कारण दरभंगा में उच्च न्यायालय की बेंच वर्षो से अधर में लटका हुआ है। अररिया,शिवहर और सीतामढी प्रदेश में सबसे पिछङा राज्य बनकर रह गया है।आईआईएम एवं आईआईटी की माँग बरसों से हो रही है, इसका न होना मिथिला के टैलेंट का घोर उपेक्षा है।मैथिल के मान-सम्मान एवं पहचान के लिये मिथिला राज्य जरूरी है। प्रो० अमरेंद्र कुमार झा ने कहा है कि नेपाल में हाईडैम बनना हीं बाढ और सुखाङ से मुक्ति दिला सकती है। साथ हीं धमकी दी है कि यथाशीघ्र मिथिला राज्य का गठन नही किया गया तो बिहार से दिल्ली तक जोरदार आंदोलन किया जायेगा। अपने अध्यक्षीय भाषण में डा० परमानन्द यादव ने कहा कि मैथिली भाषा संवैधानिक होने के बाद भी राज्य और केन्द्र में उपेक्षित है, राज्य के मैथिली अकादमी पटना में ताला लगा हुआ है।

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