- डेढ़ लाख से अधिक कांवड़ यात्रियों ने किया भगवान शिव का अभिषेक
- 25 अगस्त को निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा, 100 से अधिक स्थानों पर सेवादार करेंगे श्रद्धालुओं की सेवा
भक्ति में दिखावे की आवश्यकता नहीं
सोमवार को धाम पर पहुंचे कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति में किसी प्रकार के दिखावे और आडंबर की आवश्यकता नहीं है। भगवान भाव के भूखे हैं और सच्चे मन से की गई भक्ति ही सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में चरित्र, ज्ञान और व्यवहार का विशेष महत्व है। इन तीनों चीजों की नकल कोई नहीं कर सकता। व्यक्ति का चरित्र उसके कर्मों, ज्ञान उसके आचरण और व्यवहार उसके संस्कारों से दिखाई देता है।
25 अगस्त को निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन मास के प्रत्येक सोमवार को सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। आगामी 25 अगस्त को भी भव्य कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए 100 से अधिक स्थानों पर सेवा केंद्र बनाए जाएंगे, जहां विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के सेवादार पेयजल, फलाहार, चाय और प्रसादी सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन एवं विभिन्न सेवा संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक लगातार दिखाई दे रही कांवड़ यात्रियों की भीड़, भगवा ध्वज और सेवा पंडालों ने पूरे क्षेत्र को शिवभक्ति और सेवा के रंग में रंग दिया है। सावन के तीसरे सोमवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने कुबेरेश्वरधाम की भक्ति और आस्था को और व्यापक स्वरूप प्रदान किया।

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