- बारिश के बीच निकली 11 किमी की भव्य कांवड़ यात्रा, पंडित प्रदीप मिश्रा ने कांवड़ लेकर श्रद्धालुओं के साथ किया सफर; 100 से अधिक स्थानों पर सेवा शिविर
बारिश की फुहारों के बीच नहीं रुके कदम
यात्रा शुरू होते ही बारिश की फुहारें शुरू हो गईं, लेकिन श्रद्धालुओं के कदम नहीं रुके। कांवड़िए बारिश में भी भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते रहे। किसी के कंधे पर कांवड़ थी तो किसी के हाथ में भगवा ध्वज। पूरे मार्ग पर शिव नाम के जयकारों और भजनों की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा। ऐसा लग रहा था मानो बारिश की बूंदें भी शिवभक्तों की इस आस्था यात्रा का अभिषेक कर रही हों। कांवड़िए कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर सीवन के पवित्र जल से भगवान कुबेरेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना करते नजर आए।
100 से अधिक सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं की सेवा
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर से कुबेरेश्वरधाम तक विभिन्न स्थानों पर 100 से अधिक सेवा शिविर लगाए गए। इनमें भोजन-प्रसादी, फलहारी खिचड़ी, नाश्ता, केले, फल, बिस्किट और पेयजल की व्यवस्था की गई। क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के साथ विठलेश सेवा समिति के सेवादार भी सेवा कार्य में जुटे रहे। विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित सेवादारों ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसादी की व्यवस्था की। समिति के अनुसार बड़ी संख्या में पहुंचे कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं को भंडारे में भोजन कराया गया।
झांकियां और भजनों ने बांधा समां, 450 किलोमीटर भगवान भोलेनाथ की झांकी लेकर पहुंचे
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रसिद्ध भजन गायकों ने भजनों की प्रस्तुतियां दीं। आधा दर्जन से अधिक आकर्षक झांकियां, बैंड-बाजे और भजन मंडलियां यात्रा का विशेष आकर्षण रहीं। महाराष्ट्र के जलगांव से आए श्रद्धालुओं का दल भगवान भोलेनाथ की झांकी के साथ करीब 450 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर कुबेरेश्वरधाम पहुंचा।
कई राज्यों से पहुंचे शिवभक्त
कांवड़ यात्रा में मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु शामिल हुए। विदेशों से भी शिवभक्त कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। अलग-अलग क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने यात्रा में शामिल होकर सीवन नदी के जल से भगवान शिव का अभिषेक किया।
सीवन घाट पर भीड़ बढ़ी तो पुल से भरवाया जल
श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए। सीवन नदी घाट पर भीड़ को नियंत्रित करते हुए कांवड़ियों के लिए पुल पर नलों के माध्यम से जल भरने की व्यवस्था की गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे मार्ग पर तैनात रहीं। यातायात, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष निगरानी रखी गई।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने जताया सभी का आभार
कुबेरेश्वरधाम पहुंचने के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा को सफल बनाने में सभी का सहयोग रहा है। उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूरे सावन माह लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन के बीच चिकित्सा, पार्किंग, यातायात, भोजन-प्रसादी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और सीवन नदी तट की व्यवस्थाओं को संभालने में सभी ने मिलकर कार्य किया। श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे सामाजिक संगठनों और सेवादारों के योगदान की भी उन्होंने सराहना की। सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक निकली इस कांवड़ यात्रा में बारिश, भक्ति, सेवा और शिव नाम का ऐसा संगम दिखाई दिया कि पूरा मार्ग मानो शिवमय हो गया।

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