- रक्षाबंधन पर महिलाओं ने बाबा को बांधा रक्षा सूत्र, सीवन जल से किया अभिषेक, पंडित प्रदीप मिश्रा बोले-शिव पर अडिग विश्वास कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति देता है
महिलाओं ने बाबा को बांधा रक्षा सूत्र, बताया- कुबेरेश्वरधाम हमारा मायका
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में महिलाओं ने कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर बाबा का मंगल तिलक किया। कई महिलाओं ने भगवान शिव को रक्षा सूत्र भी बांधा और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने सीवन नदी के तट से लाए जल से भगवान शिव का अभिषेक किया। महिलाओं ने कहा कि कुबेरेश्वरधाम उनके लिए मायके जैसा है, जहां पहुंचकर उन्हें अपनापन और आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति का सरल मार्ग उन्हें पंडित प्रदीप मिश्रा के माध्यम से मिला है और इसी विश्वास के साथ वे हर वर्ष बाबा के दरबार में पहुंचती हैं।
विठलेश सेवा समिति ने किया श्रद्धालुओं का स्वागत
मंगल तिलक महोत्सव के दौरान विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित विप्रजनों ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। कांवड मेले का अंतिम दिवस था। कांवड़ियों के झुंड कंधों पर जल लिए शिवत्व को आत्मसात करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे तो यह सनातन परंपरा की उस अनंत धारा का साक्षात प्रकटीकरण है जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना में प्रवाहित होती रही है। यह महीना शिव-आराधना का सबसे पवित्र काल है। यही वह समय है जब पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था और सृष्टि को विनाश से बचाया था।
कंकर में शंकर की आस्था
कुबेरेश्वरधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में कंकर में शंकर की आस्था भी देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में मौजूद शिव स्वरूपों की श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की। रक्षाबंधन के अवसर पर मुरली मनोहर मंदिर में भगवान शिव-पार्वती, भगवान श्रीराम-माता सीता और भगवान श्रीकृष्ण-राधा के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पर्व की खुशियां मनाईं। सुबह से लेकर दिनभर धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भक्ति, आस्था और रक्षाबंधन के उल्लास से पूरा कुबेरेश्वरधाम शिवमय नजर आया।

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